नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दी, जिसमें एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता पर व्हाट्सएप संदेश साझा करने का आरोप है जिसमें कहा गया था कि ‘‘अच्छा हिंदू होने के लिए गोमांस का सेवन आवश्यक है।’’
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति उज्ज्वल भूइयां की पीठ ने बुद्ध प्रकाश बौद्ध द्वारा दायर याचिका पर मध्यप्रदेश पुलिस एवं अन्य को नोटिस जारी किया।
बौद्ध ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश के विरुद्ध शीर्ष न्यायालय में अपील की, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
उच्च न्यायालच ने अपने आदेश में कहा था कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया उन अपराधों के तत्वों को दर्शाते हैं जिनके तहत मामला दर्ज किया गया है।
अदालत ने कहा था, ‘‘वर्तमान मामला ऐसी सामग्री के प्रकाशन या प्रसार से जुड़ा है जो धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती है या समाज में असहमति एवं वैमनस्य को बढ़ावा दे सकती है। विवादित प्राथमिकी में लगाए गए आरोप, यदि अपने मूल रूप में देखे जायें, तो प्रथम दृष्टया लगाए गए अपराधों के तत्वों को दर्शाते हैं।”
पुलिस के अनुसार, ‘‘बौद्ध ने व्हाट्सएप पर सात पृष्ठों का एक संदेश पोस्ट किया था, जिसमें हिंदू धर्म और ब्राह्मण समुदाय के बारे में “अपमानजनक एवं भ्रामक” टिप्पणियां की गई थीं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संदेशों में यह दावा किया गया था कि “अच्छा हिंदू बनने के लिए गोमांस का सेवन आवश्यक है और कुछ अवसरों पर बैलों की बलि और मांस का सेवन अनिवार्य होता है।”
संदेशों में यह भी कहा गया था कि “ब्राह्मण नियमित रूप से गौवंश का मांस खाते थे और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में गायों और बैलों की कथित रूप से बलि दी जाती थी।”
इसके बाद बौद्ध के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।
भाषा रंजन रंजन अविनाश
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