अदालत ने कनॉट प्लेस ‘हिट एंड रन’ मामले में व्यक्ति की दो साल की जेल की सजा बरकरार रखी
अदालत ने कनॉट प्लेस ‘हिट एंड रन’ मामले में व्यक्ति की दो साल की जेल की सजा बरकरार रखी
नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने कनॉट प्लेस में 2016 में हुई ‘हिट एंड रन’ की घटना से जुड़े मामले में एक व्यक्ति को सुनाई गई दो साल की जेल की सजा बरकरार रखी है।
अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत वाहन चालक की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह दुर्घटना के तुरंत बाद वाहन रोके और घायल व्यक्ति को निकटतम अस्पताल पहुंचाने के लिए हर संभव उचित कदम उठाए। हालांकि, इस मामले में अपीलकर्ता दुर्घटना के बाद तुरंत मौके से फरार हो गया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन की अदालत रोहित कुमार की अपील पर सुनवाई कर रही थी। कुमार को एक मजिस्ट्रेट अदालत ने फरवरी 2025 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 279 (लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाना) तथा 304ए (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत दोषी ठहराया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला सात जुलाई 2016 का है, जब कुमार की कार ने कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल पर एक अन्य कार को टक्कर मारी और इसके बाद पैदल यात्री कुंदन को कुचल दिया। सिर में लगी चोटों के कारण बाद में कुंदन की मौत हो गई।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि कुमार दुर्घटना के तुरंत बाद घटनास्थल से फरार हो गया था।
अदालत ने एक जुलाई के अपने आदेश में कहा, ‘‘लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के अपराधों में सजा तय करते समय चालक का दुर्घटना के बाद का आचरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। घायल को सहायता दिए बिना दुर्घटनास्थल से भागना दंडनीय ‘हिट एंड रन’ माना जाता है और कानून में इसकी सख्त मनाही है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड में साबित प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य, चिकित्सकीय साक्ष्य और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर यह माना जाता है कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ता/आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और 304ए के तहत अपराध को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है।’’
कुमार की नरमी बरतने की याचिका खारिज करते हुए अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजाओं को बरकरार रखा। आईपीसी की धारा 304ए के तहत उसे दो साल के साधारण कारावास और 10,000 रुपये के जुर्माने तथा धारा 279 के तहत तीन महीने की जेल और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अदालत ने अपने आदेश में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी की गवाही का भी उल्लेख किया। पुलिसकर्मी ने गवाही दी थी कि कार बेहद तेज गति से ‘‘टेढ़े-मेढ़े तरीके’’ से चलाई जा रही थी और उसने पैदल यात्री को फुटपाथ पर कुछ दूरी तक घसीटा था।
अदालत ने दुर्घटना में शामिल वाहन की यांत्रिक जांच रिपोर्ट पर भी गौर किया, जिसमें कार का अगला बंपर अपनी जगह से हटा हुआ और एयरबैग खुले पाए गए थे।
अदालत ने कहा, ‘‘एयरबैग खुलने का अर्थ यही है कि दुर्घटना या टक्कर बहुत जबरदस्त तरीके से हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति की मौत हुई और दूसरे वाहन को भी नुकसान पहुंचा।’’
भाषा गोला रंजन
रंजन
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