माकपा और भाजपा का केरल में 30 से अधिक सीट पर समझौता है: सांसद प्रेमचंद्रन

माकपा और भाजपा का केरल में 30 से अधिक सीट पर समझौता है: सांसद प्रेमचंद्रन

माकपा और भाजपा का केरल में 30 से अधिक सीट पर समझौता है: सांसद प्रेमचंद्रन
Modified Date: March 22, 2026 / 01:51 pm IST
Published Date: March 22, 2026 1:51 pm IST

कोल्लम (केरल), 22 मार्च (भाषा) ‘रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी’ (आरएसपी) के वरिष्ठ नेता एन. के. प्रेमचंद्रन ने केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच 30 विधानसभा सीट को लेकर चुनावी समझौता होने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नीत विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ऐसे हर ‘‘अनैतिक गठजोड़’’ को हराकर चुनाव मैदान में विजयी होगा।

केरल विधानसभा चुनाव नौ अप्रैल को होंगे। आरएसपी कांग्रेस नीत विपक्षी यूडीएफ का एक घटक दल है।

पिनराई विजयन नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के कटु आलोचक एवं वरिष्ठ लोकसभा सदस्य प्रेमचंद्रन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘केरल के 30 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में माकपा और भाजपा के बीच लेन-देन पर आधारित आपसी समझ है।’’

प्रेमचंद्रन ने हालांकि कहा कि यूडीएफ इस ‘‘अनैतिक गठजोड़’’ से निपट लेगी।

कोल्लम के सांसद ने दावा किया कि वाम सरकार के खिलाफ तीव्र सत्ता विरोधी लहर है।

उन्होंने कहा कि यूडीएफ विभिन्न क्षेत्रों में विकास पर केंद्रित एक स्पष्ट योजना के साथ चुनाव में उतर रहा है और उसने अपनी नीतियां लोगों के सामने रखी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव के लिए हमारे पास स्पष्ट योजना और नीतियां हैं।’’

प्रेमचंद्रन ने आरोप लगाया कि एलडीएफ की सरकार में स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, निवेश और वित्त समेत विभिन्न क्षेत्र ‘‘ढह’’ गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे जनता में व्यापक असंतोष है और यूडीएफ का मुख्य लक्ष्य लोगों का विश्वास फिर से हासिल करना है।’’

उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन नकारात्मक अभियान के बजाय रचनात्मक और सकारात्मक प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी रैलियों से स्पष्ट है, जिनमें हाल में संपन्न ‘पुथुयुग यात्रा’ भी शामिल है, जिसे व्यापक स्वीकार्यता मिली। मैं नौ जिलों में इसका हिस्सा रहा।’’

प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि युवा पीढ़ी यूडीएफ की कल्याणकारी और विकास उन्मुख नीतियों के प्रति आकर्षित हो रही है। उन्होंने चुनाव में सत्ता विरोधी लहर को अहम कारक बताते हुए दावा किया कि सरकार एवं मुख्यमंत्री विजयन दोनों के खिलाफ लोगों में काफी असंतोष है।

उन्होंने माकपा पर भ्रष्टाचार करने और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर संपत्ति जुटाने का भी आरोप लगाया।

प्रेमचंद्रन ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि जी सुधाकरन समेत माकपा के कई पूर्व नेता पार्टी छोड़ चुके हैं और यूडीएफ उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें कुछ कांग्रेस के चुनाव चिह्न से मैदान में हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘केरल के राजनीतिक इतिहास में यह अप्रत्याशित है और यह दिखाता है कि पार्टी अपने मूल मूल्यों से भटक गई है।’’

उन्होंने कहा कि माकपा ‘‘अत्यधिक दक्षिणपंथी नीतियों’’ की ओर खिसक गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘वाम मूल्यों को मानने वाले लोग, जिनमें माकपा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के समर्थक भी शामिल हैं, पिनराई विजयन को मुख्यमंत्री के रूप में लौटने नहीं देंगे। इस बात की चिंता है कि केरल का हाल पश्चिम बंगाल या त्रिपुरा जैसा हो सकता है।’’ उनका स्पष्ट संकेत कम्युनिस्ट सरकार की हार की ओर था।

शबरिमला से सोना गायब होने के मुद्दे पर सांसद ने कहा कि देवस्वओम बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं से श्रद्धालु आहत हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना ने सरकार और माकपा, दोनों को ‘‘बेनकाब’’ कर दिया है।

केरल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव के संबंध में प्रेमचंद्रन ने कहा कि माकपा और भाजपा के बीच आपसी समझ है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले साल नवंबर में विजयन की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई बैठकों में ‘‘गुप्त समझौते’’ हुए।

उन्होंने कहा, ‘‘अब यह कई निर्वाचन क्षेत्रों में स्पष्ट हो रहा है। 30 से अधिक सीट पर ऐसी व्यवस्था होने के स्पष्ट संकेत हैं।’’

उन्होंने आरएसपी के बारे में कहा कि वह चार सीट पर चुनाव लड़ रही है और एक निर्वाचन क्षेत्र में एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन कर रही है। उन्होंने इन सभी सीट पर पार्टी की जीत का भरोसा जताया। उन्होंने दावा किया कि यूडीएफ कुल मिलाकर करीब 100 सीट जीतेगा।

भाषा

सिम्मी गोला

गोला


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