कासरगोड (केरलम), 27 सितंबर (भाषा) कांग्रेस विधायक संदीप वारियर ने रविवार को आरोप लगाया कि त्रिकारिपुर में उनकी जीत के बावजूद माकपा और उसके नेता उनके खिलाफ सांप्रदायिक अभियान चला रहे हैं। यह क्षेत्र वाम दल का पारंपरिक गढ़ रहा है।
वारियर ने यह आरोप माकपा नेता पी जयराजन के उस बयान के जवाब में लगाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने चुनाव के दौरान उसके उम्मीदवार वी पी पी मुस्तफा के खिलाफ सांप्रदायिक मुद्दों पर आधारित अभियान चलाया था।
भाजपा छोड़कर 2024 में कांग्रेस में शामिल हुए वारियर ने कासरगोड जिले की त्रिकारिपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। इस सीट का दशकों तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रतिनिधित्व किया था।
वारियर ने कहा, ‘‘करीब दो साल पहले मैंने भाजपा छोड़ दी, सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति को त्याग दिया, संघ परिवार को खारिज किया और कांग्रेस का हिस्सा बन गया।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में शामिल होने के बाद 2024 के पलक्कड़ उपचुनाव के दौरान माकपा ने उनके खिलाफ सांप्रदायिक अभियान शुरू किया था।
वारियर ने आरोप लगाया कि माकपा ने उन्हें मुस्लिम विरोधी के रूप में पेश करने की कोशिश की, ताकि उन अल्पसंख्यक मतों को बांटा जा सके जो अन्यथा संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को मिलते।
उन्होंने कहा कि माकपा नेतृत्व भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद लगातार उनके राजनीतिक अतीत का मुद्दा उठाता रहा।
उन्होंने कहा, “माकपा नेतृत्व लगातार मेरी पिछली राजनीतिक पृष्ठभूमि का इस्तेमाल मेरे खिलाफ सांप्रदायिक अभियान चलाने के लिए करता है।”
थ्रीकरिपुर चुनाव का जिक्र करते हुए वारियर ने कहा कि माकपा अब आईयूएमएल पर सांप्रदायिक अभियान चलाने का आरोप लगाकर अपनी हार को सही ठहराने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा, “असल में माकपा का पूरा सांप्रदायिक अभियान मेरे खिलाफ केंद्रित था।”
वारियर ने कहा कि उनकी जीत लोगों के बीच किए गए काम और नफरत एवं द्वेष की राजनीति के विरोध को दर्शाती है।
चुनाव के बाद माकपा की विस्तारित राज्य समिति की बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को मतदाताओं को दोष देने के बजाय अपनी गलतियों की समीक्षा करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि जयराजन का यह कहना कि पार्टी ने कोई गलती नहीं की और मतदाता जिम्मेदार हैं, मतदाताओं का अपमान है।
वारियर ने कहा कि त्रिकारिपुर 60 साल से अधिक समय से वाम दल का गढ़ रहा है और यहां माकपा के प्रमुख नेताओं ने प्रतिनिधित्व किया है, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री ईएमएस नंबूदरीपाद और ई के नयनार का नाम शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लोग भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे थे और बदलाव चाहते थे। मैं उस बदलाव का केवल एक माध्यम था।’’
वारियर ने कहा कि त्रिकारिपुर में यूडीएफ की जीत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ अन्य सीट पर माकपा में अंदरूनी मतभेदों के बीच निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।
उन्होंने मुस्तफा के खिलाफ यूडीएफ द्वारा सांप्रदायिक अभियान चलाए जाने के आरोपों को खारिज किया और आरोप लगाया कि त्रिकारिपुर में अभियान इसके बजाय उनके खिलाफ चलाया गया था।
वारियर ने कहा कि आईयूएमएल कार्यकर्ताओं, विशेष रूप से वनिता लीग के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ फैलाई गई कथित भ्रामक सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए काम किया।
त्रिकारिपुर चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय विकास के मुद्दे और लोगों की परेशानियां प्रमुख मुद्दे थे।
उन्होंने कहा, “चुनाव खत्म हो चुका है और मैं केवल यूडीएफ या उसके कार्यकर्ताओं का विधायक नहीं हूं; मैं त्रिकारिपुर के सभी लोगों का विधायक हूं।”
वारियर ने माकपा नेताओं से आग्रह किया कि वे उनके पिछले राजनीतिक जुड़ाव को लेकर उन्हें निशाना बनाना बंद करें और जनता के फैसले को स्वीकार करें।
उन्होंने कहा कि माकपा को चुनाव परिणामों का विश्लेषण करना चाहिए और मतदाताओं को दोष देने के बजाय आत्म-सुधार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जनता के फैसले को स्वीकार करें।”
भाषा रंजन सुरेश
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