नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह को पत्र लिखकर नोएडा में हालिया विरोध प्रदर्शन के बाद कई श्रमिकों को अवैध हिरासत में रखने और उचित प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाया तथा तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
माकपा नेता ने 17 अप्रैल को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ टेलीफोन पर हुई चर्चा का हवाला दिया और उनसे वेतन वृद्धि और काम करने की स्थिति पर विरोध प्रदर्शन के बाद कथित तौर पर हिरासत में लिए गए ‘एक हजार से अधिक श्रमिकों और अन्य’ को रिहा करने का आग्रह किया।
माकपा से जुड़े संगठनों ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल द्वारा तैयार की गई ‘तथ्यान्वेषी रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए पत्र में 13 से 17 अप्रैल के बीच की गई गिरफ्तारियों में संवैधानिक सुरक्षा उपायों से ‘प्रथम दृष्टया विचलन’ का आरोप लगाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में श्रमिक, राहगीर, महिलाएं और किशोर शामिल हैं।
माकपा नेता ने कहा कि स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों और आवासीय क्षेत्रों से लोगों को उठाया गया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि लगभग 350 किशोरों और लगभग 800 वयस्कों को अकेले कासना में हिरासत में लिया गया था तथा परिवारों को कई दिनों तक उनके के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में, बंदियों को प्राथमिकी की प्रतियां नहीं दी गईं या गिरफ्तारी के आधार की जानकारी नहीं दी गई, जिससे कानूनी उपायों और प्रतिनिधित्व तक उनकी पहुंच में बाधा उत्पन्न हुई।
भाषा हक राखी दिलीप
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