माकपा ने धनशोधन मामले में ईडी की जांच की आलोचना की, ‘राजनीतिक बदले की भावना’ बताया

माकपा ने धनशोधन मामले में ईडी की जांच की आलोचना की, ‘राजनीतिक बदले की भावना’ बताया

माकपा ने धनशोधन मामले में ईडी की जांच की आलोचना की, ‘राजनीतिक बदले की भावना’ बताया
Modified Date: August 21, 2026 / 03:35 pm IST
Published Date: August 21, 2026 3:35 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 21 अगस्त (भाषा) केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी टी. वीना से जुड़े धन शोधन मामले की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय पर तीखा हमला किया और आरोप लगाया कि एजेंसी का इस्तेमाल “राजनीतिक बदले की भावना” से किया जा रहा है।

अपने मुखपत्र ‘देशाभिमानी डेली’ में छपे एक तीखे संपादकीय में, वामपंथी पार्टी ने आरोप लगाया कि ईडी की “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” सफल नहीं होगी और एजेंसी पर जांच के नाम पर डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया।

संपादकीय में कहा गया कि एजेंसी “जासूसी कहानियां गढ़ रही थी” और मामले में देरी पर सवाल उठाए गए। इसमें आरोप लगाया गया कि व्यक्तियों के खिलाफ आरोपों को लेकर राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाना “राजनीतिक प्रतिशोध” के बराबर है।

ईडी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि मई में वीना के ठिकानों पर तलाशी के दौरान उसने कुछ हाथ से लिखे नोट जब्त किए थे, जिनमें दुबई में कुछ रकम अंतरित होने की जानकारी थी।

संपादकीय में कहा गया, “जांच एजेंसियां ​​सत्ताधारी दल का राजनीतिक हथियार नहीं हैं; वे संविधान और कानून के प्रति जवाबदेह संस्थाएं हैं।”

माकपा ने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल “सबसे बड़े हथियार” के तौर पर तेजी से किया जा रहा है।

इसमें कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़े मामलों का जिक्र किया गया और आरोप लगाया गया कि सरकार की आलोचना करने वाले मीडिया संगठनों को भी ईडी जैसी एजेंसियों के जरिए चुप कराने की कोशिशें की गईं।

संपादकीय में कहा गया है कि माकपा और उसके नेताओं को निशाना बनाने वाले “राजनीतिक अभियान” के बीच सीएमआरएल-एक्सालॉजिक जांच फिर से अहम हो गई है।

इसमें कहा गया है, “जांच के नाम पर पार्टी नेताओं के दोस्तों तक पहुंचना, जासूसी कहानियां गढ़ना और मामले को लंबा खींचना—ये सब बातें रहस्यमयी हैं।”

पार्टी ने कहा कि जांच एजेंसियों को कानून के मुताबिक अपराधों की जांच करनी चाहिए, सबूत इकट्ठा करने चाहिए और आरोपपत्र दाखिल करना चाहिए। साथ ही, पार्टी का कहना था कि मीडिया के जरिए लगातार आरोप लगाने को राजनीतिक प्रचार के एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

संपादकीय में कहा गया, “आरोप लगने से कोई व्यक्ति अपराधी नहीं बन जाता। प्राथमिकी में नाम आना, छापेमारी होना या मीडिया में रिपोर्ट आना अपराध साबित नहीं करता।” इसमें यह भी कहा गया कि अपराध साबित करने का काम केवल अदालत ही कर सकती है।

धन शोधन का यह मामला केरल की खनन कंपनी सीएमआरएल और वीना द्वारा प्रवर्तित कंपनी “एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ (जो अब बंद हो चुकी है) से जुड़ा है। जांच उन आरोपों के बारे में है कि सीएमआरएल ने बिना कोई सेवा लिए ही एक्सालॉजिक को 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश


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