दिग्गज ओड़िया पार्श्व गायक प्रणब पटनायक का 88 वर्ष की उम्र में निधन

दिग्गज ओड़िया पार्श्व गायक प्रणब पटनायक का 88 वर्ष की उम्र में निधन

दिग्गज ओड़िया पार्श्व गायक प्रणब पटनायक का 88 वर्ष की उम्र में निधन
Modified Date: August 21, 2026 / 03:46 pm IST
Published Date: August 21, 2026 3:46 pm IST

भुवनेश्वर, 21 अगस्त (भाषा) दिग्गज ओड़िया पार्श्व गायक प्रणब पटनायक का शुक्रवार को यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी।

वह 88 वर्ष के थे।

पांच दशक से अधिक समय तक ओड़िया संगीत और फिल्म उद्योग में शिखर पर रहे पटनायक को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम श्वांस ली।

पटनायक के परिवार में पत्नी कस्तूरी पटनायक और दो बेटे हैं।

दिवंगत पार्श्व गायक के लोकप्रिय गीतों में ‘माझी रे’, ‘मुन के सहारे’, ‘तुमा गांव महुमाछी’, ‘चला आमे पलाईजिबा शहर’, ‘प्रेम तीनि जाति’ और ‘स्मृति तोर फेरे’ शामिल हैं।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, बीजू जनता दल (बीजद) के प्रमुख नवीन पटनायक और कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।

माझी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह दिग्गज गायक के निधन से ‘‘बहुत दुखी’’ हैं। उन्होंने लिखा कि पटनायक की ‘‘दिल को छू लेने वाली आवाज’’ ने ओडिशा के लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जयदेव पुरस्कार, ओडिशा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और राज्य फिल्म पुरस्कार सहित कई सम्मानों से सम्मानित प्रणब पटनायक के निधन से ओड़िया कला और संस्कृति जगत में अपूरणीय क्षति हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस दुख की घड़ी में मैं शोकाकुल परिवार और उनके असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं तथा भगवान श्री जगन्नाथ से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। ॐ शांति।’’

नवीन पटनायक ने कहा, ‘‘संगीत जगत को समृद्ध करने में उनके (प्रणब पटनायक) योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। इस दुख की घड़ी में मैं शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और दिवंगत आत्मा की शाश्वत शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।’’

वरिष्ठ राजनीतिज्ञ विजय महापात्र ने भी प्रणब पटनायक के निधन पर शोक व्यक्त किया और गायक के साथ अपने करीबी संबंधों को याद किया।

प्रणब पटनायक का जन्म 20 जनवरी 1938 को हुआ था। उन्हें संगीत की प्रेरणा अपने पिता लाल मोहन पटनायक से मिली, जो ओडिशा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष थे।

पटनायक ने 1958 में ओड़िया फिल्म ‘मां’ से पार्श्व गायन की शुरुआत की और बाद में 200 से अधिक ओड़िया फिल्मों के लिए अपनी आवाज दी।

पार्श्व गायन के अलावा पटनायक ने ओडिसी संगीत, लोक गीत, भक्ति और भजन संगीत, अर्ध-शास्त्रीय रचनाओं, पारंपरिक गीतों, हिंदी गीत और गजल के क्षेत्र में भी योगदान दिया। वह आकाशवाणी से भी लंबे समय तक जुड़े रहे।

उन्हें जयदेव पुरस्कार, 2023 में बालकृष्ण दास स्मृति पुरस्कार, 2017 में गंगाधर रथ स्मृति पुरस्कार, 2011 में प्रफुल्ल कर पुरस्कार, 2010 में बिग ओड़िया एंटरटेनमेंट पुरस्कार और 1997-98 के लिए ओडिशा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई सम्मानों से नवाजा गया था।

भाषा प्रचेता मनीषा

मनीषा


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