आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए सीआरपीएफ ने शीर्ष अधिकारियों का ‘विशेष समूह’ बनाया

आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए सीआरपीएफ ने शीर्ष अधिकारियों का 'विशेष समूह' बनाया

आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए सीआरपीएफ ने शीर्ष अधिकारियों का ‘विशेष समूह’ बनाया
Modified Date: August 20, 2026 / 06:53 pm IST
Published Date: August 20, 2026 6:53 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने जवानों में आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का 10-सदस्यीय ‘विशेष समूह’ (कोर ग्रुप) गठित किया है। बल में वर्ष 2025 में आत्महत्या के 59 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं।

अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस समूह की अध्यक्षता सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) करेंगे और यह ऐसी घटनाओं की ‘विस्तृत’ समीक्षा के लिए महीने में एक बार समूह की बैठक होगी।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3.25 लाख जवानों वाले सीआरपीएफ में वर्ष 2025 में 59 जवानों ने खुदकुशी की। आत्महत्या करने वालों में 80 प्रतिशत से अधिक सिपाही (कांस्टेबल) स्तर के कर्मचारी शामिल थे। वर्ष 2021 से 2025 के बीच दर्ज 262 मामलों में से 77 प्रतिशत से अधिक (202 घटनाएं) जवानों के ड्यूटी पर तैनात रहने के दौरान हुईं, जबकि बाकी जवान छुट्टी पर थे।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 14 अगस्त को इन खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव और सीआरपीएफ के डीजी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।

अधिकारियों ने बताया कि यह विशेष समूह हर मामले का निष्पक्षता से विश्लेषण करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह से रोकने के लिए आवश्यक प्रशासनिक, कल्याणकारी और चिकित्सीय उपायों का सुझाव देगा।

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जवानों की लगातार तैनाती, परिवार से दूरी और काम व निजी जीवन में संतुलन की कमी जैसी वजहें इन घटनाओं के मुख्य कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा पारिवारिक समस्याएं भी इसकी एक बड़ी वजह पाई गई हैं।

बल में वर्ष 2025 में 59, 2024 में 46, 2023 में 57, 2022 में 43 और 2021 में 57 जवानों ने खुदकुशी की थी।

अधिकारियों के अनुसार, सीआरपीएफ के कुल सक्रिय जवानों में से लगभग 95 से 97 प्रतिशत जवान हर समय आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबले या कानून-व्यवस्था बनाए रखने के काम में लगे रहते हैं।

भाषा सुमित संतोष

संतोष


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