नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) पश्चिमी दिल्ली में अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों के नागरिकों से तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ कर 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हरेश्वर वी. स्वामी ने यहां पत्रकारों को बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर बृहस्पतिवार रात साइबर पुलिस और विशेष स्टाफ ने तीन स्थानों पर छापेमारी की और हरि नगर तथा कीर्ति नगर में तीन कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया।
उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान परिसर में अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल-सेंटर संचालित होते मिले, जहां आरोपी ऐप्पल/आईओएस और माइक्रोसॉफ्ट के तकनीकी-सहायता व ग्राहक सेवा कर्मी बनकर इंटरनेट-आधारित ‘कॉलिंग एप्लिकेशन’ के माध्यम से विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे।
स्वामी ने बताया कि पुलिस ने कॉल सेंटर के कथित मालिकों, प्रबंधकों, बैंकरों और टेलीकॉलर सहित 23 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया।
उनके मुताबिक, परिसर 27 लैपटॉप, 28 मोबाइल फोन, राउटर, हेडफोन और कॉल सेंटर के संचालन के लिए उपयोग किए जाने वाले अन्य तकनीकी उपकरण जब्त किए गए। उन्होंने बताया आरोपियों के पास से दो कारें और 79 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि उपकरणों की जांच करने पर उनमें विदेशी कॉल विवरण, विदेशी टेलीफोन नंबरों की सूची, पीड़ित से संबंधित जानकारी, भुगतान के स्क्रीनशॉट, व्हाट्सऐप पर बातचीत और अन्य आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री मिली।
उनके मुताबिक, जांच में पता चला कि व्हाट्सऐप बिजनेस अकाउंट और कई व्हाट्सऐप समूहों का इस्तेमाल कथित तौर पर समन्वय, टीएफएन (टैक्स फाइल नंबर) से जुड़ी जानकारी साझा करने और धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम के प्रबंधन के लिए किया जा रहा था।
डीसीपी ने बताया कि आरोपी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर खुद को एप्पल या आईओएस और माइक्रोसॉफ्ट के तकनीकी सहायता या ग्राहक सेवा कर्मी बताकर इंटरनेट कॉलिंग के जरिए अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों के लोगों को निशाना बनाते थे।
उनके मुताबिक, अनधिकृत खरीदारी, सदस्यता या सुरक्षा संबंधी समस्याओं से जुड़े फर्जी ’पॉप-अप’ और संदेश भेजकर पीड़ितों को ऐसे टोल-फ्री नंबरों पर संपर्क करने के लिए प्रेरित किया जाता था, जिन्हें भारत में इंटरनेट आधारित ‘कॉलिंग एप्लिकेशन’ के जरिए काम कर रहे टेलीकॉलर संभालते थे।
अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों को झांसे में लेने के बाद उनकी कॉल ऐसे लोगों को स्थानांतरित कर दी जाती थी, जो खुद को वरिष्ठ अधिकारी या ‘बैंकर’ बताते थे और वे कथित समस्या के समाधान के लिए लगभग 149 अमेरिकी डॉलर, 249 अमेरिकी डॉलर या 499 अमेरिकी डॉलर की मांग करते थे।
उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ितों को ‘एप्पल गिफ्ट कार्ड’ या ‘ज़ेल’ के माध्यम से भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
उनके अनुसार, आरोपी संगठित तरीके से गिरोह चला रहे थे और करीब दो महीने से सक्रिय थे।
उन्होंने बताया कि गिरोह ने कितने लोगों के साथ ठगी की है, इसका पता लगाने के लिए मामले की जांच जारी है।
भाषा नोमान नोमान माधव
माधव