शिमला के ‘कार्ट मार्ग’ पर मलबा आ जाने से भीषण जाम, सिरमौर में भूस्खलन का खतरा

शिमला के ‘कार्ट मार्ग’ पर मलबा आ जाने से भीषण जाम, सिरमौर में भूस्खलन का खतरा

शिमला के ‘कार्ट मार्ग’ पर मलबा आ जाने से भीषण जाम, सिरमौर में भूस्खलन का खतरा
Modified Date: July 12, 2026 / 07:34 pm IST
Published Date: July 12, 2026 7:34 pm IST

(तस्वीरों सहित)

शिमला, 12 जुलाई (भाषा) हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रविवार सुबह कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय के पास ‘कार्ट मार्ग’ पर मलबा आ जाने और एक पेड़ गिरने से कई घंटों तक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही।

‘कार्ट मार्ग’ को इस शहर की जीवनरेखा माना जाता है।

घटना की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंचीं और मशीनों की मदद से सड़क से मलबा हटाने का काम शुरू किया।

इस महत्वपूर्ण मार्ग के दोनों ओर वाहन फंस गए, जिसके कारण कुछ समय के लिए वाहनों को शिमला बाईपास से वैकल्पिक रास्तों से गुजारा गया। हालांकि, बारिश के कारण सड़कों पर फिसलन और रविवार की भीड़ की वजह से उन रास्तों पर भी भारी जाम लग गया।

हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार शाम तक पिछले 24 घंटे में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के शिमला केंद्र ने राज्य में 18 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। इस दौरान सुंदरनगर और मुरारी देवी में गरज के साथ बारिश हुई। मंडी जिले के जोगिंदरनगर में पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक 60 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, इसके बाद मनाली में 45 मिलीमीटर, सराहन में 38.5 मिलीमीटर, रोहड़ू में 25 मिलीमीटर और शिमला में 19 मिलीमीटर बारिश हुई।

दूसरी ओर, सिरमौर जिले के शिलाइन-झुरवाड़ी गांव के ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में सड़क निर्माण के दौरान विभाग ने जरूरी सुरक्षा दीवारें नहीं बनाईं, जिससे भूस्खलन का खतरा और बढ़ गया है।

उप-प्रधान दीप राम शर्मा ने बताया कि यह सड़क 2016 में बनाई गई थी और सुरक्षा दीवारें बनाने के लिए निविदा भी जारी की गयी थी। इसके बावजूद, ठेकेदार ने समय पर दीवारों का निर्माण नहीं किया, जिससे अब गांव के पांच घरों पर खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने कहा कि दीप राम, प्रेम दत्त, बस्ती राम, तुलसी राम और लायक राम के घर कभी भी ढह सकते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस बारे में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को बार-बार सूचित किया, लेकिन विभाग ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

भाषा खारी सुरेश

सुरेश


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