अधिकारियों की नियुक्ति का फैसला सरकार पर छोड़ दिया जाना चाहिए: शिवकुमार

अधिकारियों की नियुक्ति का फैसला सरकार पर छोड़ दिया जाना चाहिए: शिवकुमार

अधिकारियों की नियुक्ति का फैसला सरकार पर छोड़ दिया जाना चाहिए: शिवकुमार
Modified Date: September 22, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: September 22, 2026 4:20 pm IST

बेंगलुरु, 22 सितंबर (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने केपीएससी भर्ती में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए एक एसआईटी का नेतृत्व करने वाले अधिकारी का नाम तय करने के उच्च न्यायालय के फैसले पर मंगलवार को सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार का अधिकार है और यह काम सरकार पर ही ‘छोड़ दिया जाना चाहिए।”

शिवकुमार ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उच्च न्यायालय किसी अधिकारी का नाम तय करके इस मामले में ‘कैसे हस्तक्षेप कर सकता है।’

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) भर्ती में कथित अनियमितताओं की नयी सिरे से जांच के लिए सोमवार को आलोक कुमार, डीजीपी (जेल और सुधार सेवाएं) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एसआईटी के गठन का आदेश दिया था।

अदालत ने अपराध जांच विभाग (सीआईडी) और स्थानीय पुलिस को अपने रिकॉर्ड और सबूत विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने हर 30 दिन में प्रगति रिपोर्ट पेश करने और 100 दिन में जांच पूरी करने को कहा है।

शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘जांच कराने में कुछ भी गलत नहीं है। हमारी पुलिस पहले ही मामले की जांच कर चुकी है और बहुत अच्छा काम कर रही है।’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन अधिकारियों के मामले में, मुझे नहीं पता कि वह (उच्च न्यायालय) कैसे हस्तक्षेप कर सकता है। अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित कई निर्देश और कानूनी प्रावधान हैं। मैं इस पर कानूनी रूप से विचार करूंगा।’

शिवकुमार ने कहा कि सरकार को यह तय करने की अनुमति मिलनी चाहिए कि किसे नियुक्त करना है।

उन्होंने कहा कि किसे नियुक्त करना है यह निर्णय सरकार पर ही छोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘किसे नियुक्त करना है और किसे नियुक्त नहीं करना है, इसका फैसला करने की छूट सरकार को दी जानी चाहिए। यह काम सरकार पर छोड़ दिया जाना चाहिए।’

भाषा जोहेब नरेश

नरेश


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