मानहानि मामला : उच्च न्यायालय से राहुल को नहीं मिली राहत, अंतिम आदेश ग्रीष्मावकाश के बाद

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मानहानि मामला : उच्च न्यायालय से राहुल को नहीं मिली राहत, अंतिम आदेश ग्रीष्मावकाश के बाद

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  • Publish Date - May 2, 2023 / 09:17 PM IST,
    Updated On - May 2, 2023 / 09:17 PM IST

अहमदाबाद, दो मई (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने ‘मोदी उपनाम’ टिप्पणी से संबंधित आपराधिक मानहानि मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मंगलवार को अंतरिम राहत प्रदान करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इस चरण में उन्हें संरक्षण नहीं प्रदान किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह ग्रीष्मावकाश के बाद अंतिम आदेश सुनाएगा।

गांधी (52) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद ‘तत्कालिकता’ का हवाला देते हुए अदालत से अंतरिम या अंतिम आदेश जारी करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि आपराधिक मानहानि मामले में शायद ही कोई ऐसा उदाहरण होगा, जिसमें तीन से छह माह से अधिक की जेल की सजा हुई हो और उनके मुवक्किल से पहली बार यह गलती हुई है।

शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी के वकील ने गांधी को अंतरिम राहत के लिए सिंघवी के अनुरोध का विरोध किया और कहा कि अगर अयोग्य सांसद अपने मानहानि वाले बयानों के लिए माफी नहीं मांग सकते हैं, तो उन्हें दोषसिद्धि पर रोक के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा भी नहीं खटखटाना चाहिए।

दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक ने कहा कि ‘मोदी उपनाम’ संबंधी टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले के इस चरण में अंतरिम संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

न्यायमूर्ति प्रच्छक ने कहा कि वह रिकॉर्ड और कार्यवाही की अधिकृत रपट पढ़ने के बाद ही अंतिम आदेश सुनाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने ग्रीष्मावकाश के बाद फैसला सुनाने की बात कही। गुजरात उच्च न्यायालय में आठ मई से तीन जून तक ग्रीष्मावकाश है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गुजरात के विधायक एवं मामले के मूल शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी की ओर से पेश अधिवक्ता निरुपम नानावती ने गांधी को अंतरिम राहत प्रदान करने के सिंघवी के अनुरोध का पुरजोर विरोध किया।

पूर्णेश मोदी के वकील ने कहा कि 40 साल तक देश पर राज करने वाले राष्ट्रीय राजनीतिक दल का नेता होने के नाते गांधी को ‘सीख मिलनी’ ही चाहिए कि अपने राजनीतिक विद्रोहियों के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नानावती ने कहा कि अगर गांधी अपने अपमानजनक बयानों के लिए माफी नहीं मांग सकते हैं, तो उन्हें सजा पर रोक के लिए राहत की प्रार्थना के साथ अदालत का रुख भी नहीं करना चाहिए।

नानावती ने कहा कि दोषी ठहराए जाने और एक सांसद के रूप में उन्हें अयोग्य ठहराये जाने के बाद भी गांधी अपने बयान पर कायम रहे और माफी मांगने से इनकार कर दिया। उन्होंने एक अखबार की रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसमें कांग्रेस नेता ने कहा था कि वह माफी नहीं मांगेंगे क्योंकि वह ‘गांधी’ हैं, ‘वीर सावरकर’ नहीं।

उन्होंने कहा, ‘‘उनका (गांधी का) सार्वजनिक जीवन और अदालत में रुख अलग-अलग है। यदि यह आपका सार्वजनिक रुख है, तो आप किसी भी मामले के लिए अदालत का रुख न करें, भले ही वह अयोग्यता हो, सजा या दोषसिद्धि।’’

नानावती ने कहा कि गांधी देश भर की विभिन्न अदालतों में अपनी टिप्पणी के लिए 12 आपराधिक मानहानि के मामलों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संसद ने ही एक सांसद की अयोग्यता के संबंध में कानून बनाया है। उन्होंने कहा, ‘संसद कहती है कि यह (उनका अपराध) गंभीर है, और इसमें नैतिक अधमता शामिल है। और ऐसे अपराधी की सजा पर रोक की अर्जी पर विचार नहीं किया जा सकता है।’

इस मामले में सूरत की एक अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें लोकसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहरा दिया गया था। वह केरल की वायनाड संसदीय सीट से 2019 में निर्वाचित हुए थे।

सत्र अदालत ने भी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ गांधी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

भाषा

सुरेश माधव

माधव