दिल्ली विधानसभा में समयबद्ध सेवा प्रदान करने संबंधी विधेयक पारित, देरी करने पर अधिकारियों पर लगेगा जुर्माना

दिल्ली विधानसभा में समयबद्ध सेवा प्रदान करने संबंधी विधेयक पारित, देरी करने पर अधिकारियों पर लगेगा जुर्माना

दिल्ली विधानसभा में समयबद्ध सेवा प्रदान करने संबंधी विधेयक पारित, देरी करने पर अधिकारियों पर लगेगा जुर्माना
Modified Date: August 11, 2026 / 08:19 pm IST
Published Date: August 11, 2026 8:19 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) विधानसभा द्वारा मंगलवार को पारित ‘दिल्ली (नागरिकों का समयबद्ध व सुगम सेवा प्रदाय का अधिकार) विधेयक, 2026 के अनुसार, समयबद्ध सेवाएं प्रदान किये जाने में देरी करने या आवेदनों को अनुचित तरीके से खारिज करने के लिए जिम्मेदार पाए जाने पर दिल्ली सरकार के नामित अधिकारियों को 249 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 5,000 रुपये तक का जुर्माना भरना होगा।

इस विधेयक के तहत, तय समय-सीमा में सेवाएं मिलना लोगों का कानूनी अधिकार माना जाएगा। सरकार दिल्ली सेवा का अधिकार आयोग बनाएगी और लोगों की शिकायतों को दूर करने के लिए विभागों में वरिष्ठ अधिकारियों को ‘नागरिक शिकायत निवारण प्राधिकारी’ के तौर पर तैनात किया जाएगा।

विधेयक के अनुसार, अगर विभिन्न सेवाएं प्रदान करने के लिए तय समय-सीमा का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित प्राधिकारी के पास अपने-आप अपील दर्ज हो जाएगी। अगर आवेदन नामंजूर हो जाता है, तो आवेदक को संबंधित प्रशासन के पास ऑनलाइन अपील करनी होगी।

विधेयक में कहा गया है कि अगर संबंधित प्राधिकारी को लगता है कि सेवा देने में हुई चूक गलत और अनुचित है, तो वह निर्धारित अधिकारी को सात दिनों के अंदर सेवा देने का निर्देश देगा। संबंधित प्राधिकारी 30 दिनों के भीतर अपीलों पर फैसला करेगा।

विधेयक के मुताबिक, संबंधित प्राधिकारी निर्धारित अधिकारी को ‘कारण बताओ नोटिस’ भी जारी करेगा और उनसे जवाब मांगेगा कि उन पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए।

विधेयक के अनुसार, निर्धारित अधिकारी सात दिनों के अंदर अपना जवाब देंगे और अगर वह ‘संतोषजनक’ नहीं पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकारी एक आदेश के ज़रिए उन पर जुर्माना लगा सकता है।

विधेयक में कहा गया है कि किसी भी निर्धारित अधिकारी पर उनका पक्ष सुने बिना कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।

विधेयक के अनुसार, जुर्माना तय अधिकारी के वेतन से वसूला जाएगा।

विधेयक में कहा गया है कि जुर्माने की रकम 250 रुपये प्रति दिन होगी, जो ज़्यादा से ज़्यादा 5,000 रुपये तक हो सकती है।

विधेयक के मुताबिक, अगर संबंधित प्राधिकारी खुद अपील पर कार्रवाई करने के लिए तय समय-सीमा का पालन नहीं करता है, तो आवेदक दिल्ली अधिकार सेवा आयोग के सामने अपील कर सकता है।

विधेयक के अनुसार, आयोग संबंधित प्राधिकारी के आदेशों की पुष्टि कर सकता है, उनमें बदलाव कर सकता है या उन्हें रद्द कर सकता है। आयोग का आदेश अंतिम और बाध्यकारी होगा।

इसमें कहा गया है कि जब तक सरकार सेवा का अधिकार आयोग का गठन नहीं करती, तब तक जन शिकायत आयोग ही सेवा का अधिकार आयोग का काम करेगा।

विधेयक के अनुसार, सेवा का अधिकार आयोग में एक अध्यक्ष और तीन सदस्य होंगे। ‘समय-सीमा के भीतर सेवाएं देने के कानून’ को लागू करना इस आयोग की ज़िम्मेदारी होगी। इसे इस प्रक्रिया में शामिल तय अधिकारी या किसी अन्य अधिकारी पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी होगा।

विधानसभा द्वारा पारित यह विधेयक ‘दिल्ली (नागरिकों का समय-सीमा के भीतर सेवाएं पाने का अधिकार) कानून, 2011′ की जगह लेगा।

दरअसल यह पाया गया था कि असरदार निगरानी और लागू करने वाले तंत्र की कमी के कारण, तय समय-सीमा को लागू करने के लिए यह कानून अपर्याप्त था।

नया कानून सरकारी अधिकारियों की ज़िम्मेदारी तय करने, अपने-आप मामले को ऊंचे स्तर पर भेजने (ऑटोमैटिक एस्केलेशन) और ‘सेवा का अधिकार आयोग’ बनाने की पूरी व्यवस्था पेश करता है।

दिल्ली के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री पंकज सिंह ने विधानसभा में इस कानून पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इसका मकसद यह पक्का करना है कि नागरिकों को सेवाओं का लाभ उठाने के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

भाषा राजकुमार नरेश दिलीप

दिलीप


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