नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने साल 2016 में पत्नी की जलाकर हत्या करने के एक आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया है और कहा है कि केवल मौत से ठीक पहले दिए गए बयान के आधार पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हिमांशु रमन सिंह ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अदालत उत्तम नगर के निवासी अरविंद चौधरी की याचिका पर विचार कर रही थी।
अदालत ने सात फरवरी के आदेश में कहा, ‘‘न्यायालय का मानना है कि अभियोजन पक्ष अभियुक्त अरविंद चौधरी के विरुद्ध अपने मामले को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा। अतः अभियुक्त को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के अंतर्गत दंडनीय अपराध से बरी किया जाता है।’’
चौधरी पर 19 सितंबर, 2016 को अपनी पत्नी पूजा पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का आरोप था। पूजा की 27 सितंबर को मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष की दलील मुख्य रूप से घटना वाले दिन एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान पर आधारित था, जिसमें महिला ने आरोप लगाया था कि घरेलू विवाद के बाद उसके पति ने उसपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
इस बयान को मृत्यु से पहले दिया गया बयान बताया जा रहा था।
हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान, मृतक के पिता और भाई ने गवाही दी कि जब वे 21 सितंबर को अस्पताल में उससे मिले, तो उसने उन्हें बताया कि खाना पकाते समय गलती से उसे आग लग गई थी।
अदालत ने चौधरी को आरोप से बरी करते हुए कहा, ‘‘आरोपी को केवल मृत्यु-पूर्व दिए गए बयान के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।’’
भाषा जोहेब सुरेश
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