दिल्ली की अदालत ने 2016 के यौन उत्पीड़न मामले में दो लोगों को बरी किया

दिल्ली की अदालत ने 2016 के यौन उत्पीड़न मामले में दो लोगों को बरी किया

दिल्ली की अदालत ने 2016 के यौन उत्पीड़न मामले में दो लोगों को बरी किया
Modified Date: October 17, 2024 / 08:53 pm IST
Published Date: October 17, 2024 8:53 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने आठ साल पहले एक महिला का यौन उत्पीड़न करने और उसे आपराधिक रूप से धमकाने के आरोप में दो लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में तरह विफल रहा।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना जैन मोहम्मद वसीम और बॉबी के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रही थीं, जिन पर दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बिंदापुर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया था।

वसीम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, इशारा या कृत्य) के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों ने शिकायतकर्ता का यौन उत्पीड़न उस समय किया था, जब वह तीन जनवरी, 2016 की रात को अपने पड़ोसियों के साथ अपनी मां के घर जा रही थी।

अभियोजन पक्ष ने बताया कि वसीम और शिकायतकर्ता के बीच हाथापाई हुई, जब उसने महिला पर अभद्र टिप्पणी की। इसके बाद आरोपी ने महिला को धमकाने के लिए उस पर रिवॉल्वर तान दी।

एक अक्टूबर के अपने आदेश में अदालत ने कहा कि मामला शिकायतकर्ता और उसके साथ आई दो महिलाओं की गवाही पर आधारित है।

अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ने हालांकि अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया और “पूरी तरह से मुकर” गयी, जबकि दूसरे प्रत्यक्षदर्शी ने दोनों के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं कहा।

तीसरे प्रत्यक्षदर्शी के संबंध में अदालत ने कहा कि उसकी गवाही को खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि यह विश्वसनीय और सुसंगत नहीं पायी गयी।

अदालत ने दोनों को बरी करते हुए कहा, “अभियोजन पक्ष के तीनों गवाहों में से कोई भी दोष साबित नहीं कर सका…अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है।”

भाषा प्रशांत रंजन

रंजन

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