नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने जून 2018 में प्रवासी मजदूर को लूटने और चाकू मारने वाले गिरोह के एक सदस्य को हत्या के प्रयास का दोषी ठहराते हुए कहा कि बेशक उसने हथियार का इस्तेमाल नहीं किया लेकिन अभियोजन पक्ष ने अपराध करने के साझा इरादे को साबित कर दिया है।
अदालत ने यह भी कहा कि लूटी गई वस्तुओं या अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी न होने से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमेध कुमार सेठी ने सोना लाल उर्फ सोने लाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 394 (लूटपाट करते समय चोट पहुंचाना) के साथ धारा 34 (साझा इरादा) के तहत दोषी ठहराया।
न्यायाधीश ने कहा कि आईपीसी की धारा 397 (लूटपाट, जिसमें मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाने का प्रयास शामिल है) लागू नहीं की जा सकती क्योंकि आरोपी ने व्यक्तिगत रूप से घातक हथियार का इस्तेमाल नहीं किया था। अदालत ने कहा कि हालांकि वह उस समूह का हिस्सा था जिसने लूटपाट को अंजाम दिया था और सह-आरोपियों के साथ उसकी समान मंशा थी।
अदालत ने यह भी कहा कि लूटी गई वस्तुओं या अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी न होने से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता, न ही स्वतंत्र सार्वजनिक गवाहों की अनुपस्थिति से ऐसा होता है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोना लाल ने मोहम्मद अफरोज को 20 जून 2018 को आनंद विहार क्षेत्र से ऑटो रिक्शा में जबरन ले जाकर जीटीबी एन्क्लेव में एक सुनसान स्थान पर उससे नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सामान लूट लिया। लूटपाट के दौरान, चाकू से अफरोज पर वार किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
अदालत ने 14 जनवरी के आदेश में कहा, ‘‘रिकॉर्ड पर मौजूद सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए, इस अदालत की राय है कि आरोपी सोना लाल उर्फ सोने लाल शिकायतकर्ता की हत्या के प्रयास की घटना में और साथ ही लूटपाट के समय शिकायतकर्ता को गंभीर चोट पहुंचाने में शामिल था।’
अदालत ने कहा कि चिकित्सकीय साक्ष्यों से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर दो गहरे घाव दिखाई दिए, जो सामान्य परिस्थितियों में मृत्यु का कारण बनने के लिए पर्याप्त थे।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अदालत की राय है कि शिकायतकर्ता के बयान के अनुसार, लूटपाट के उद्देश्य से उसके पेट और गर्दन में गंभीर चोटें पहुंचाने के लिए चाकू का इस्तेमाल करना, शिकायतकर्ता को लूटने के बाद उसकी हत्या करने के इरादे को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त है।’’
भाषा आशीष खारी
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