नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने बुधवार को 2021 के एक मामले में एसएफआई की संयुक्त सचिव आइशी घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) रद्द कर दिए और उन्हें 30 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट विजयश्री राठौड़ ने आइशी घोष की ओर से दायर उस आवेदन पर संज्ञान लिया जिसमें कहा गया था कि वह पिछली सुनवाई की तारीख पर ‘अपरिहार्य परिस्थितियों’ के कारण उपस्थित नहीं हो सकी थीं और एनबीडब्ल्यू रद्द करने का अनुरोध किया।
मजिस्ट्रेट ने अगली सुनवाई की तारीख 30 अगस्त तक गैर-जमानती वारंट पर रोक लगा दी और घोष को उस दिन ‘‘व्यक्तिगत रूप से पेश होने’’ का निर्देश दिया।
यह मामला 2021 में बाराखंभा रोड पुलिस थाने में आइशी घोष के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी से संबंधित है। यह प्राथमिकी तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 188 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना), 447 (आपराधिक अतिक्रमण) और 34 (साझा इरादा) के तहत दर्ज की गई थी।
इससे पहले, ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) नेताओं ने 2021 के मामले में घोष को गिरफ्तार करने के कथित प्रयास के बाद दिल्ली पुलिस पर ‘‘बदले की कार्रवाई’’ करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई उन छात्र नेताओं के खिलाफ व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जिन्होंने हाल में युवाओं के प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था।
आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस ने कहा कि जांच अधिकारी का दौरा अदालत के आदेश के तहत ‘‘एक पुराने गैर-जमानती वारंट मामले’’ के संबंध में था न कि हाल में हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश