उप्र के विधायक राजा भैया के खिलाफ दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेने से दिल्ली की अदालत का इनकार
उप्र के विधायक राजा भैया के खिलाफ दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेने से दिल्ली की अदालत का इनकार
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने पत्नी के उत्पीड़न के आरोप में उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेने से मंगलवार को इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि कथित पुरानी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से शिकायतकर्ता को कोई मदद नहीं मिलेगी। अदालत ने साफ किया कि अगर हाल ही में कोई ऐसा कृत्य नहीं हुआ है, जो क्रूरता को साबित करता हो, तो बहुत पुराने आरोपों को फिर से उठाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें आईपीसी की धारा 498ए (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा विवाहित महिला के साथ की गई क्रूरता) के तहत दायर अंतिम रिपोर्ट पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया था।
मजिस्ट्रेट ने कहा, “अदालत इस बात को लेकर संतुष्ट नहीं है कि आईपीसी की धारा 498ए के तहत अपराध के मुख्य पहलू प्रारंभिक तौर पर स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। इसके अलावा, अदालत का यह भी मानना है कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप समयसीमा के कारण अब वैध नहीं हैं।”
उन्होंने कहा कि कथित अपराध का संज्ञान लेने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने कहा, “प्राथमिकी को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि शारीरिक हिंसा और स्पष्ट क्रूरता के मुख्य आरोप उस घटना से जुड़े हैं, जो कथित तौर पर 2015 में हुई। वास्तव में, शादी के साल यानी 1995 से लेकर 2015 में पहली बार कथित तौर पर मारपीट होने से पहले तक शारीरिक क्रूरता का कोई आरोप नहीं है।”
अदालत ने कहा कि प्राथमिकी दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव थाने में मार्च 2025 में दर्ज की गई थी, और इसमें काफी समय का अंतराल हो चुका था।
अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले दोनों पक्ष कई वर्षों (2017 से 2025) तक अलग रह रहे थे।”
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप

Facebook


