Delhi Excise Policy Case: शराब घोटाला केस में कोर्ट ने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को किया बरी, CBI को लगाई फटकार, कहा- ‘बिना सबूत आरोप साबित नहीं होते’
Delhi Excise Policy Case: शराब घोटाला केस में कोर्ट ने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को किया बरी, CBI को लगाई फटकार, कहा- 'बिना सबूत आरोप साबित नहीं होते'
Delhi Excise Policy Case | Photo Credit: IBC24
- केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी
- CBI की दोषपूर्ण जांच पर फटकार
- आबकारी नीति में कोई साजिश या आपराधिक इरादा नहीं पाया गया
नई दिल्ली: Delhi Excise Policy Case शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी कर दिया।
सीबीआई को लगाई फटकार
Delhi Excise Policy Case साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को दोषपूर्ण जांच के लिए फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि आरोप पत्र में कई ऐसी कमियां हैं जिनका सबूतों से समर्थन नहीं मिलता। सीबीआई आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है।
23 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई का मामला बंद
दरअसल, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया शराब घोटाला मामले की सुनवाई के लिए राउज़ एवेन्यू कोर्ट पहुंचे थे। केजरीवाल और सिसोदिया व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, जबकि के. कविता, अमनदीप ढल और कई अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हुए। कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए अपने फैसले में कहा कि आबकारी नीति में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक इरादा नहीं था। इसी के साथ कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई का मामला बंद कर दिया है।
2022-23 में दर्ज हुआ था मामला
बता दें, मामला 2022-23 की दिल्ली की शराब नीति से जुडा है जिसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सीबीआई ने केस दर्ज किया था। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के कई नेताओं को जेल जाना पड़ा था। खुद अरविंद केजरीवाल 6 महीने जेल में रहकर आए थे। मामले को लेकर सीबीआई और ईडी का आरोप था कि साउथ ग्रुप नाम की एक लॉबी से 100 करोड़ की रिश्वत ली गई और बदले में उन्हें लाइसेंस फीस में छूट और अन्य फायदे दिए गए।
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