नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) राजधानी में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारी के तहत दिल्ली सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-दिल्ली के सहयोग से पीएम2.5 और पीएम10 के स्रोतों की वास्तविक समय पर निगरानी तथा 30 इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) आधारित यांत्रिक रोड स्वीपर खरीदने को मंगलवार को मंजूरी दे दी।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में धूल हटाने की व्यवस्था को मजबूत करने और प्रदूषण के स्रोतों की वैज्ञानिक तरीके से वास्तविक समय पर पहचान सुनिश्चित करने के लिए ये फैसले लिए गए।
यांत्रिक सफाई व्यवस्था को छोटी सड़कों तक भी विस्तारित किया जाएगा और 30 इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) आधारित यांत्रिक रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को अनुदान दिया जाएगा।
बयान के अनुसार, इस पहल के तहत 10 मीटर से कम चौड़ाई वाले 609 किलोमीटर लंबे मार्गों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए 250 वार्ड में कुल 854 सड़कों की पहचान की गई है।
वहीं, एमसीडी की मंगलवार को हुई आम बैठक में प्रदूषण और खराब साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान विभिन्न दलों के पार्षदों ने निर्माण गतिविधियों, कचरा संग्रहण, खुले में कचरा जलाने और श्मशान घाटों से होने वाले प्रदूषण को लेकर चिंता जताई।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षदों ने कहा कि केवल निर्माण स्थलों के चालान काटना प्रदूषण से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं होगा और उन्होंने निर्माण सामग्री बेचने वाली दुकानों पर सख्त निगरानी की मांग की।
कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों ने भी कई वार्डों में कचरा संग्रहण को लेकर चिंता जताई और आरोप लगाया कि कई बार दो से तीन दिन बाद कचरा उठाया जाता है।
करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक में शाम लगभग सवा चार बजे उस समय व्यवधान पैदा हुआ जब बैठक से अनुपस्थित रहे आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षद सदन में पहुंचे और विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करने लगे।
भाषा आशीष अमित
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