दिल्ली सरकार आईआईटी के साथ मिलकर वायु प्रदूषण के स्रोतों की वास्तविक समय में निगरानी करेगी

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दिल्ली सरकार आईआईटी के साथ मिलकर वायु प्रदूषण के स्रोतों की वास्तविक समय में निगरानी करेगी

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 08:07 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 08:07 PM IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) दिल्ली सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली (आईआईटी-डी) के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी के वायु प्रदूषण के स्रोतों की वास्तविक समय में निगरानी और विश्लेषण करने और छोटी सड़कों की सफाई के लिए 30 ईवी आधारित ‘मैकेनिकल रोड स्वीपिंग’ मशीने तैनात करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी।

बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आईआईटी दिल्ली के सहयोग से पीएम2.5 और पीएम10 के प्रदूषण स्रोतों की लगातार वास्तविक समय में पहचान और विश्लेषण की व्यवस्था विकसित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई।

इसमें कहा गया है कि इसके अलावा कैबिनेट ने छोटी सड़कों पर मशीनीकृत सफाई व्यवस्था का विस्तार करने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें (एमआरएसएम) उपलब्ध कराने के लिए अनुदान देने को भी मंजूरी दे दी।

गुप्ता ने बताया कि आईआईटी-डी के सहयोग से प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान और उनकी मात्रा का वैज्ञानिक विश्लेषण 24 घंटे किया जा सकेगा और इस व्यवस्था के माध्यम से वाहनों से होने वाला प्रदूषण, सड़क की धूल, बायोमास जलाना जैसे प्रदूषण स्रोतों की पहचान और आकलन किया जाएगा।

बयान के मुताबिक, आईआईटी दिल्ली के साथ यह सहयोग पांच वर्षों के लिए होगा और इस पर लगभग 19.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें कहा गया है कि परियोजना में ‘रियल-टाइम डैशबोर्ड’, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तथा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डीपीसीसी) में अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्य शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि राउज एवेन्यू स्थित मौजूदा ‘सुपर साइट’ को वैज्ञानिक संचालन के लिए फिर से सक्रिय किया जाएगा और इसके साथ मोबाइल प्रयोगशाला को भी दोबारा सक्रिय किया जाएगा, जिससे प्रदूषण ‘हॉटस्पॉट’ और स्थानीय स्रोतों का लक्षित अध्ययन किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सड़क की धूल को कणीय प्रदूषण (पार्टिकुलेट पॉल्यूशन) का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानते हुए कैबिनेट ने उन छोटी सड़कों पर मशीनीकृत सफाई का विस्तार करने का निर्णय लिया है, जहां फिलहाल ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत ऐसी करीब 609 किलोमीटर लंबी सड़कों को शामिल किया गया है, जिनके लिए निर्धारित सड़क-क्षेत्र (राइट ऑफ वे) की चौड़ाई 10 मीटर से कम है। इन सड़कों में 250 वार्डों की कुल 854 सड़कें शामिल हैं।

गुप्ता ने बताया कि सरकार इस पहल के लिए नगर निगम को अनुदान उपलब्ध कराएगी और निगम जमीन पर मशीनों की तैनाती और संचालन करेगा।

उन्होंने कहा, “ईवी आधारित 30 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की इस व्यवस्था पर 10 वर्षों में लगभग 393.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है… इस निर्णय के माध्यम से दिल्ली सरकार और नगर निगम मिलकर सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई को और व्यापक बनाएंगे।”

गुप्ता ने कहा कि ये दोनों फैसले प्रदूषण से उसके स्रोत पर ही निपटने के लिए सरकार की उस रणनीति को दिखाते हैं जिसमें पर्याप्त कोष, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल, साफ-सुथरी तकनीक और संस्थागत वैज्ञानिक विशेषज्ञता को एक साथ लाया गया है।

भाषा नोमान नोमान माधव

माधव