दिल्ली उच्च न्यायालय ने मोईन कुरैशी की बेटी की वीजा याचिका पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने मोईन कुरैशी की बेटी की वीजा याचिका पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया

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  • Publish Date - April 21, 2026 / 01:15 PM IST,
    Updated On - April 21, 2026 / 01:15 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मांस निर्यातक मोईन अख्तर कुरैशी की बेटी पर्निया कुरैशी के वीजा आवेदन पर प्राधिकारियों को शीघ्रता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा कि पर्निया कुरैशी वीजा देने के लिए आवेदन प्रस्तुत करेंगी। उन्होंने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को लागू दिशानिर्देशों के अनुसार उन्हें वीजा जारी करने का प्रयास करने के निर्देश दिए।

अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा अमेरिकी नागरिक पर्निया कुरैशी का ‘भारतीय मूल की निवासी’ (पीआईओ) का दर्जा रद्द करने के फैसले के खिलाफ उनके द्वारा 2019 में दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया।

पर्निया ने 2018 के उस पत्र को भी चुनौती दी जिसमें उन्हें सूचित किया गया था कि जिस व्यक्ति के माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी पाकिस्तान के नागरिक थे, वह ‘भारत का विदेशी नागरिक’ (ओसीआई) कार्ड के लिए पात्र नहीं है।

अदालत ने 20 अप्रैल को पारित आदेश में कहा, ‘‘इस मामले में याचिकाकर्ता वीजा प्रदान करने के लिए भी आवेदन करेंगीं, जिस पर प्रतिवादी द्वारा विधिवत कार्रवाई की जाएगी और विचार किया जाएगा।’’

अदालत ने निर्देश दिए कि ‘‘एफआरआरओ आवेदन पर शीघ्रता से कार्रवाई करें और लागू दिशानिर्देशों के अनुसार याचिकाकर्ता को वीजा जारी करने का प्रयास करें।’’

अदालत ने प्राधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे पर्निया कुरैशी की बहन अमेरिकी नागरिक – सिल्विया मोईन के वीजा आवेदन पर यथाशीघ्र और किसी भी स्थिति में 20 अप्रैल से 10 दिन के भीतर निर्णय लें।

केंद्र सरकार के अधिवक्ता राजेश गोगना ने तर्क दिया कि पर्निया कुरैशी वैध परमिट के बिना देश में रह रही थीं।

पर्निया कुरैशी ने अपनी याचिका में कहा कि उनका जन्म अक्टूबर 1983 में पाकिस्तान में हुआ था और उस समय उनकी मां पाकिस्तानी नागरिक थीं जबकि उनके पिता भारतीय नागरिक थे। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता और उनकी मां ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता त्याग दी और याचिकाकर्ता ने 1995 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की।

याचिका में कहा गया है कि हालांकि, याचिकाकर्ता ने 2007 में अमेरिकी नागरिक प्राप्त की और उसे मार्च 2008 में एक पीआईओ कार्ड जारी किया गया, जो 2023 तक वैध था।

इसी बीच, केंद्र ने नागरिकता कानून में संशोधन करके यह घोषणा की कि सभी पीआईओ कार्डधारकों को ओसीआई कार्डधारक माना जाएगा, लेकिन पर्निया कुरैशी को ओसीआई दर्जा देने से इनकार कर दिया क्योंकि अद्यतन कानूनी ढांचे में यह प्रावधान था कि जो व्यक्ति पाकिस्तान का नागरिक है या रह चुका है, वह इसके लिए पात्र नहीं है।

उच्च न्यायालय ने 19 मार्च, 2019 को केंद्र सरकार को पर्निया कुरैशी के पीआईओ कार्डधारक के रूप में दर्जे को सुनवाई की अगली तारीख तक रद्द करने से रोका और कहा कि यह निर्विवाद तथ्य है कि वह 12 साल तक भारतीय नागरिक रहीं।

भाषा यासिर वैभव

वैभव