दिल्ली उच्च न्यायालय ने पशु आहार संबंधी एफएसएसएआई विनियम को रद्द किया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पशु आहार संबंधी एफएसएसएआई विनियम को रद्द किया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पशु आहार संबंधी एफएसएसएआई विनियम को रद्द किया
Modified Date: April 7, 2026 / 08:46 pm IST
Published Date: April 7, 2026 8:46 pm IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के उस निर्देश को रद्द कर दिया, जिसके तहत दूध और मांस देने वाले पशुओं को मांस या हड्डी का चूरा युक्त आहार देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि “मानव उपभोग के लिए खाद्य पदार्थों” के विनियमन से संबंधित खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम-2006 के प्रावधानों में पशु आहार या चारा शामिल नहीं है, लिहाजा एफएसएसएआई के पास ऐसा निर्देश जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।

पीठ ने गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड की ओर से एफएसएसएआई के उस नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया था कि मुर्गी, सूअर और मछली को छोड़कर दूध और मांस देने वाले किसी भी पशु को मांस या हड्डी का चूरा युक्त आहार नहीं दिया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि मवेशियों के चारे या पशु आहार को विनियमित करने के लिए कोई भी नियम बनाना एफएसएसएआई के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

याचिका में एफएसएसएआई के इस निर्देश की भी आलोचना की गई थी कि दूध और मांस देने वाले पशुओं के लिए तैयार वाणिज्यिक चारा या आहार सामग्री बीआईएस मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि वाणिज्यिक पशु आहार के बीआईएस मानकों के अनुरूप होने का एफएसएसएआई का नियम भी कानून के दायरे से बाहर था, क्योंकि ऐसा अनुपालन स्वैच्छिक प्रकृति का होता है।

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में