दिल्ली उच्च न्यायालय सोनम वांगचुक की पत्नी की अपील पर सुनवाई करने को तैयार

दिल्ली उच्च न्यायालय सोनम वांगचुक की पत्नी की अपील पर सुनवाई करने को तैयार

दिल्ली उच्च न्यायालय सोनम वांगचुक की पत्नी की अपील पर सुनवाई करने को तैयार
Modified Date: July 20, 2026 / 12:20 pm IST
Published Date: July 20, 2026 12:20 pm IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय सफदरजंग अस्पताल में जारी वांगचुक के इलाज में दखल देने से इनकार करने संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की अपील पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को सहमत हो गया।

आंग्मो की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने एकल न्यायाधीश के रविवार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष पेश करते हुए इसे तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

इस पर उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा, ‘‘ठीक है। आज ही सुनवाई करते हैं।’’

सिब्बल ने दलील दी कि एकल न्यायाधीश ने पीठ के 16 जुलाई के उस आदेश की ‘‘गलत व्याख्या’’ की है, जिसमें प्राधिकारियों को वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सीय रूप से हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया था।

उन्होंने कहा कि पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से ‘‘जबरन’’ ले गई और अब वह सफदरजंग अस्पताल से अपनी पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित होना चाहते हैं।

सिब्बल ने कहा कि हर व्यक्ति अपनी पसंद का चिकित्सा उपचार पाने का हकदार है और ‘‘इस अधिकार को छीना नहीं जा सकता।’’

प्राधिकारियों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अनुरोध किया कि क्या इस मामले पर अपराह्न साढ़े तीन बजे या फिर मंगलवार को सुनवाई की जा सकती है। इस पर पीठ ने कहा कि इस अपील पर अपराह्न ढाई बजे सुनवाई हो सकती है।

आंग्मो ने अपनी अपील में कहा है कि एकल न्यायाधीश का रविवार का आदेश बिना किसी गिरफ्तारी के ही वांगचुक को अवैध रूप से सफदरजंग अस्पताल में रहने के लिए बाध्य करता है और यह निर्देश देता है कि न तो वांगचुक व न ही उनकी पत्नी के पास उनके चिकित्सीय उपचार से संबंधित निर्णय लेने का अंतिम अधिकार है।

अपील में यह भी कहा गया है कि आदेश में ‘सूचित सहमति’ और किसी व्यक्ति के अपने उपचार को स्वीकार करने या उससे इनकार करने के मौलिक अधिकार पर विचार नहीं किया गया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने रविवार को वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा था कि इस स्तर पर वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने संबंधी उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।

रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सक वांगचुक के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रहे हैं और ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उनके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती की जा रही है।

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को मनमाना नहीं माना जा सकता।

दिल्ली उच्च न्यायालय के 16 जुलाई के उस आदेश का उल्लेख करते हुए, जिसमें अधिकारियों को वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सीय हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया था, न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा कि चूंकि वांगचुक स्वयं किसी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे, इसलिए उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाना उसके अधिकार क्षेत्र में था।

अदालत ने कहा, ‘‘चूंकि सरकार ने सोनम वांगचुक की चिकित्सीय स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया है, इसलिए अदालत इसे मनमानी कार्रवाई नहीं मानती।’’

आंग्मो ने रविवार को अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।

सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में जारी प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

भाषा खारी सुरभि

सुरभि


लेखक के बारे में