नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को हरियाणा के गुरुग्राम में रुकी हुई ग्रीनोपोलिस आवासीय परियोजना के वास्तविक मकान खरीदारों की पहचान करने और धन वापसी की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति गठित की।
उच्च न्यायालय ने कहा कि समिति का काम ग्रीनोपोलिस परियोजना के वास्तविक घर खरीदारों की पहचान करके उनकी सूची तैयार करना होगा।
अदालत ने कहा कि इसमें यह मायने नहीं रखेगा कि खरीदारों ने परियोजना में यूनिट खरीदने के लिए राशि ‘थ्री-सी शेल्टर्स’ को दी है या ‘ऑरिस इंफ्रास्ट्रक्चर’ को।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), ग्रीनोपोलिस वेलफेयर एसोसिएशन (जीडब्ल्यूए) और ग्रीनोपोलिस वेलफेयर कन्फेडरेशन (जीडब्ल्यूसी) की ओर से दायर याचिकाओं पर यह आदेश दिया। इन याचिकाओं में निचली अदालत के 27 नवंबर, 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
पूर्व प्रधान न्यायाधीश खन्ना इस समिति के अध्यक्ष होंगे। उनकी सहायता पूर्व न्यायिक अधिकारी एच एस शर्मा और ए के कुहाड़ करेंगे।
उच्च न्यायालय ने समिति से कहा कि वह अपनी पहली बैठक के आठ महीने के अंदर काम पूरा करने का प्रयास करे और हर तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपे।
अदालत ने 98 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा, ‘निगरानी समिति वास्तविक मकान खरीदारों की पहचान और उनके द्वारा किए गए भुगतान की राशि की जांच के लिए त्वरित व पारदर्शी प्रक्रिया तैयार करेगी। इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय और मकान खरीदारों की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री का मिलान किया जाएगा।’
विशेष अदालत ने 27 नवंबर, 2025 के अपने आदेश में ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्तियों को बहाल करने और उनके निपटारे का आदेश दिया था।
संघीय एजेंसी ने लाभार्थियों की सही पहचान नहीं किए जाने और कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं होने का हवाला देते हुए इस आदेश को चुनौती दी थी।
भाषा जोहेब पवनेश
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