दिल्ली : पत्नी की हत्या कर शव के टुकड़े सेप्टिक टैंक में फेंकने के आरोपी को नहीं मिली जमानत

दिल्ली : पत्नी की हत्या कर शव के टुकड़े सेप्टिक टैंक में फेंकने के आरोपी को नहीं मिली जमानत

दिल्ली : पत्नी की हत्या कर शव के टुकड़े सेप्टिक टैंक में फेंकने के आरोपी को नहीं मिली जमानत
Modified Date: August 21, 2026 / 05:42 pm IST
Published Date: August 21, 2026 5:42 pm IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पत्नी की हत्या करके उसके शव के टुकड़े सेप्टिक टैंक में फेंकने के आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि वह महिला की हत्या के वीभत्स तरीके को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि मुकदमे में देरी जमानत देने का एक आधार हो सकती है, लेकिन यह राहत देने का एकमात्र आधार नहीं है।

उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘निश्चित रूप से मुकदमे में देरी जमानत देने का आधार है, लेकिन यह एकमात्र आधार नहीं है। जमानत देने या इनकार करने पर विचार करते समय अदालत इस तथ्य से आंखें नहीं मूंद सकती कि महिला की वीभत्स तरीके से हत्या की गई, उसके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया।’’

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस ने वर्ष 2019 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपी खुद थाने में पहुंचा था और उसने कबूल किया था कि उसने अपनी पत्नी की हत्या की, उसके शव के टुकड़े किए और उन्हें सेप्टिक टैंक में फेंक दिया।

पुलिस पूछताछ के दौरान पीड़िता के भाई की ओर से पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को फोन आया, जिसमें उसने बताया कि उसकी बहन की हत्या कर दी गई है और उसका शव सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ है। इस बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

पीड़िता के भाई ने आरोप लगाया था कि उसकी बहन ने तीन बेटियों को जन्म दिया था, जिसके कारण आरोपी और उसके परिवार के सदस्य उसे प्रताड़ित करने के साथ दहेज की मांग भी करते थे।

जमानत की मांग करते हुए आरोपी ने दावा किया था कि पीड़िता की मां और भाई की गवाही में अहम विरोधाभास हैं। लेकिन अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

आरोपी के वकील ने जमानत के लिए अनुरोध करते हुए कहा कि सुनवाई बेहद धीमी गति से हो रही है।

अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुनवाई की गति धीमी नहीं है और आरोप ऐसे नहीं हैं कि आरोपी को जमानत दी जाए।

भाषा संतोष मनीषा

मनीषा


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