दिल्ली: एनजीटी ने सिंघोला ‘डंप साइट’ पर कचरे की स्थिति को लेकर ताजा जानकारी मांगी
दिल्ली: एनजीटी ने सिंघोला ‘डंप साइट’ पर कचरे की स्थिति को लेकर ताजा जानकारी मांगी
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह सिंघोला ‘डंप साइट’ पर जमा कचरे की वास्तविक मात्रा का स्पष्ट उल्लेख करते हुए नया ब्योरा दाखिल करे। अधिकरण ने कहा कि नगर निकाय के पिछले हलफनामे में कचरे की मात्रा का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया।
हरित अधिकरण दिल्ली के सिंघोला और बवाना स्थलों पर अनुचित कचरा प्रबंधन और कचरे के ढेर से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रहा था।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफ़रोज़ अहमद की पीठ ने पांच अगस्त के एक आदेश में कहा कि एमसीडी ने नरेला-बवाना एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण केंद्र से संबंधित अपनी स्थिति रिपोर्ट रिकॉर्ड में रखी थी।
पीठ ने इस बात पर गौर किया कि नागरिक निकाय ने कहा था कि नरेला-बवाना स्थल पर वर्तमान में कोई भी अनुपचारित ठोस कचरा नहीं है और एकत्र सामग्री में केवल ‘रिफ्यूज-ड्राइव्ड फ्यूल’ (आरडीएफ) शामिल है।
‘रिफ्यूज-ड्राइव्ड फ्यूल’ ऐसा ईंधन है, जो प्लास्टिक, कागज, गत्ता, कपड़ा और अन्य सूखी सामग्री जैसे ठोस कचरे में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों को अलग करके, छांटकर और प्रसंस्करण के बाद तैयार किया जाता है।
आरडीएफ नगरपालिका के ठोस कचरे, कबाड़ और औद्योगिक कचरे से बनाया गया एक प्रकार का ज्वलनशील ऊर्जा उत्पाद है।
पीठ ने गौर किया कि ‘लैंडफिल’ से निकाले गए लगभग 34,313 मीट्रिक टन (एमटी) पुराने आरडीएफ में से 9,654.50 मीट्रिक टन का निपटान मार्च 2026 तक कर दिया गया था, जबकि शेष सामग्री का प्रसंस्करण और चरणबद्ध तरीके से निपटान किया जा रहा है।
अधिकरण ने सिंघोला के संबंध में कहा कि एमसीडी के अनुसार, इस जगह पर प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने के लिए काम आवंटन कर दिया गया है और यह प्रक्रिया नवंबर 2026 से शुरू होगी।
हालांकि, अधिकरण ने कहा कि एमसीडी वर्तमान में इस स्थान पर पड़े कचरे या आरडीएफ की मात्रा नहीं बता पाई।
अधिकरण ने कहा, ‘‘एमसीडी को अगले हलफनामे में सिंघोला स्थल पर पड़े कचरे की मात्रा बतानी होगी। अगली सुनवाई की तारीख (14 अक्टूबर) से कम से कम एक सप्ताह पहले प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।’’
भाषा खारी रंजन
रंजन

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