दिल्ली पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क और 40 करोड़ रुपये के लेन-देन का पर्दाफाश किया
दिल्ली पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क और 40 करोड़ रुपये के लेन-देन का पर्दाफाश किया
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने अप्रैल में पश्चिमी दिल्ली में एक महीने तक चले अभियान के दौरान कई अंतरराज्यीय साइबर जालसाज़ गिरोहों का भंडाफोड़ किया और 89 अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया गया। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली सहित कई राज्यों में चलाए गए अभियानों के दौरान 35 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 54 लोगों को पाबंद किया गया और साइबर धोखाधड़ी के 34 मामलों को हल किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इन गिरोह में ‘डिजिटल अरेस्ट’, निवेश के नाम पर ठगी, एपीके फाइल के जरिए फोन हैक कर धोखाधड़ी करने, फर्जी ‘डेटिंग’ सदस्यता और ‘म्यूल’ (कमीशन पर मिलने वाले) खाते उपलब्ध कराने वाले शामिल थे।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान से करीब 40 करोड़ रुपये के लेनदेन में शामिल साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।
अभियान के दौरान, पुलिस ने 14.18 लाख रुपये नकद, 359 सिम कार्ड, 218 एटीएम कार्ड, 88 मोबाइल फोन, 78 चेक बुक, पांच पासबुक, तीन क्रेडिट कार्ड, दो लैपटॉप, एक पेन ड्राइव और साइबर धोखाधड़ी की गतिविधियों में कथित रूप से इस्तेमाल की गई एक कार बरामद की।
पुलिस ने बताया कि टीमों ने महीने के दौरान बैंकों के साथ समन्वय करके 1.11 करोड़ रुपये ठगों के पास जाने से रोके। इसके अतिरिक्त, अदालती आदेशों के माध्यम से पीड़ितों को 51.95 लाख रुपये वापस किए गए।
एक बड़े अभियान में, पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली के करमपुरा से कथित तौर पर संचालित हो रहे एक अत्यधिक संगठित ‘म्यूल’ खाता और ओटीपी साझा करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने ‘डीएल ऑफिस’ नामक एक सोशल मीडिया ग्रुप का इस्तेमाल ओटीपी साझा करने और पूरे भारत में साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले ‘म्यूल’ बैंक खातों को संचालित करने के लिए किया।
आरोपियों की पहचान बिट्टू चौधरी, लविश चुघ, ऋषि, अरुण सिंह, आशीष और दीपक भट्ट के रूप में हुई है। उन्होंने कथित तौर पर छापेमारी के दौरान एक इमारत की चौथी मंजिल से कूदकर भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उन्हें पकड़ लिया।
पुलिस ने बताया कि समन्वय पोर्टल के माध्यम से किए गए तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि यह गिरोह लगभग 40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित 35 शिकायतों से जुड़ा हुआ है। यह शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनआरसीपी ) पर की गई थी।
एक अलग अभियान में, पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी के एक मामले का पर्दाफाश किया, जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक को कथित तौर पर फर्जी धनशोधन मामले में कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर जालसाज़ों ने धमकाया।
पुलिस ने पंजाब और झारखंड से चार आरोपियों – अशोक कुमार, सूरज कुमार, दीपू कुमार और विवेक कुमार – को कथित तौर पर ‘म्यूल’ खाते संचालित करने और धोखाधड़ी से प्राप्त धन को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
भाषा नोमान
नोमान माधव
माधव

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