नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने उत्तराखंड के उधम सिंह नगर से चार युवकों सहित पांच लोगों की गिरफ्तारी कर ऑनलाइन ठगी करने में शामिल एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी एक ऐसे गिरोह का हिस्सा थे जो देशभर में साइबर अपराधियों को ‘म्यूल’ (कमीशन पर) बैंक खाते मुहैया कराता था ताकि वे ठगी से हासिल पैसे को इधर-उधर भेज सकें और पकड़े जाने से बच सकें।
अधिकारियों ने बताया कि गिरोह की संलिप्तता राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज कई शिकायतों में मिली है जिसमें कुल 3,40,877 रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
आरोपियों की पहचान उधम सिंह नगर जिले के रहने वाले राज बछड़ (18), समीर बछड़ (21), रोहित रे (18), रोहित मिस्त्री (18) और हरीश सरकार (18) के रूप में हुई है।
न्यू अशोक नगर के निवासी शशि रंजन भारती द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद ये गिरफ्तारियां की गईं। उन्होंने ऑनलाइन निवेश के नाम पर 1,01,869 रुपये की ठगी का आरोप लगाया था।
पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राजीव कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता को छह अप्रैल को एक सोशल मीडिया ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां डिजिटल मार्केटिंग पेशेवर बनकर जालसाज़ों ने उत्पाद-आधारित ऑनलाइन कार्यों और योजनाओं में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर पीड़ित को अपने जाल में फंसा लिया। उसने कई बार में में पैसे स्थानांतरित किए और बाद में उसे एहसास हुआ कि उसके साथ ठगी हो गई।
जांच के दौरान, अधिकारियों ने वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, बैंक रिकॉर्ड और अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) विवरण समेत अन्य का विश्लेषण किया, जिससे पता चला कि आरोपियों के खाते उत्तराखंड से संचालित हो रहे हैं।
डीसीपी के मुताबिक, पुलिस ने पाया कि ठगी से हासिल राशि में से 50,000 रुपये राज के खाते में स्थानांतरित किए गए थे, और बाद में पैसा समीर सहित अन्य के खातों में भेजा गया।
इसके बाद पुलिस की एक टीम को उत्तराखंड भेजा गया, जहां निरंतर तकनीकी निगरानी और स्थानीय खुफिया जानकारी जुटाने के बाद सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने बताया कि राज और समीर ‘म्यूल’ (कमीशन पर) खाते देते थे जबकि अन्य तीन आरोपी बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। उन सब को कमीशन मिलता था।
अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं और आगे की जांच जारी है।
भाषा नोमान नोमान माधव
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