दिल्ली पुलिस, चंद्रशेखर आजाद ने यूट्यूबर की अग्रिम जमानत याचिका का उच्च न्यायालय में विरोध किया

दिल्ली पुलिस, चंद्रशेखर आजाद ने यूट्यूबर की अग्रिम जमानत याचिका का उच्च न्यायालय में विरोध किया

दिल्ली पुलिस, चंद्रशेखर आजाद ने यूट्यूबर की अग्रिम जमानत याचिका का उच्च न्यायालय में विरोध किया
Modified Date: September 16, 2026 / 06:42 pm IST
Published Date: September 16, 2026 6:42 pm IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के नगीना से लोकसभा सदस्य चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करने के मामले में बुधवार को यहां उच्च न्यायालय में यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि आरोपी द्वारा कथित तौर पर कहे गए शब्द सीधे तौर पर एक खास जाति का अपमान करते हैं। आजाद के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कथित टिप्पणियां अपमानजनक हैं और इरादतन की गई थीं।

हालांकि, भारती के वकील ने यह कहते हुए राहत प्रदान करने का अनुरोध किया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एससी/एसटी अधिनियम) मौजूदा मामले में लागू नहीं होता, क्योंकि इसमें इरादतन अपमानित या बेइज्जती नहीं की गई है और यूट्यूबर की टिप्पणियों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें वे की गई थीं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि वह भारती की याचिका पर आदेश जारी करेंगे।

सरकारी वकील ने दलील दी कि भारती ने कथित तौर पर ये शब्द सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहे थे, इसलिए ऐसा नहीं है कि यह बंद कमरे में कहा गया था। उन्होंने दलील दी कि एससी/एसटी अधिनियम लागू करने के लिए हर जरूरी चीज यहां मौजूद है, इसलिए अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।

अदालत ने पुलिस से पूछा कि भारती को जांच में शामिल होने के लिए कितने नोटिस भेजे गए।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उन्हें कोई नोटिस नहीं भेजा गया? क्यों? हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आपको जरूरत है या नहीं?’

इस पर सरकारी वकील ने कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) को आरोपी का पता दो दिन पहले एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मिला, और इसलिए वह उन्हें कोई नोटिस नहीं भेज पाए।

भारती के वकील ने दलील दी कि जाति का जिक्र करने मात्र से (एससी/एसटी अधिनियम के तहत) मामला नहीं बन जाता, जब तक कि इसके पीछे उक्त व्यक्ति को जाति के आधार पर अपमानित या नीचा दिखाने का इरादा न हो।

उन्होंने कहा कि आजाद के बारे में भारती की टिप्पणी सोशल मीडिया पर हुई तीखी बहस के संदर्भ में थी और यूट्यूबर का इरादा सांसद को उनकी जाति के कारण निशाना बनाना नहीं था।

उन्होंने कहा कि भारती ने जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था, बल्कि अपने परिवार के सदस्य के खिलाफ गंभीर उकसावे का जवाब दिया था।

मामले की सुनवाई कर रही यहां की एक अदालत द्वारा सात सितंबर को इस मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद भारती ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।

भीम आर्मी के प्रमुख आजाद ने दिल्ली पुलिस से की गई शिकायत में आरोप लगाया है कि भारती ने सोशल मीडिया पर उनके विरूद्ध और अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों एवं डॉ भीम राव आंबेडकर के खिलाफ जातिसूचक, अपमानजनक और नीचा दिखाने वाली टिप्पणी की।

प्राथमिकी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।

मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उसके समक्ष मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया एससी/एसटी अधिनियम के तहत अपराध का मामला बनता है, जो आरोपी को अग्रिम जमानत देने से रोकता है।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश


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