यौन शोषण सामग्री मामले में बाल अधिकार निकाय के समक्ष फिर पेश हुए मेटा इंडिया के शीर्ष अधिकारी
यौन शोषण सामग्री मामले में बाल अधिकार निकाय के समक्ष फिर पेश हुए मेटा इंडिया के शीर्ष अधिकारी
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) सोशल मीडिया मंच पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सीएसईएएम) वाले विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में मेटा इंडिया के बड़े अधिकारी बुधवार को एक हफ्ते में दूसरी बार राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के सामने पेश हुए।
बाल अधिकार आयोग के सामने पेश होने वालों में मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास भी शामिल थे। बैठक में क्या हुआ इस बारे में मीडिया के बार-बार पूछे गए सवालों का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
एनसीपीसीआर ने बेंगलुरु में कंपनी द्वारा चलाए जा रहे एक पालना-घर में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी कैपजेमिनी के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी अलग से तलब किया।
नौ सितंबर को, एनसीपीसीआर ने मंच पर सीएसईएएम से जुडे कथित विज्ञापनों की जांच के सिलसिले में मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को तलब किया था।
बाल अधिकार संस्था ने कथित विज्ञापनों पर ‘बीबीसी आई’ की एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया और मेटा से स्पष्टीकरण मांगा।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (आई4सी) द्वारा चलाए जा रहे साइबर अपराध पोर्टल पर करने के लिए पहले ही सहमत हो गई है। सरकार ऑनलाइन बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और अन्य हानिकारक सामग्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और सोशल मीडिया मंच से बेहतर सुरक्षा उपाय और ज्यादा जवाबदेही की मांग कर रही है।
मेटा के एक प्रवक्ता ने कहा था कि कंपनी के लिए अपने मंच पर बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “हम सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इन अपराधों को अंजाम देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।”
प्रवक्ता ने कहा था, “इस नुकसान से निपटने के लिए अपनी कोशिशों को मिलकर मजबूत करने के मकसद से, मेटा अब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे आई4सी द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर करेगा।”
अमेरिका में मुख्यालय वाली मेटा पहली बड़ी प्रौद्योगिकी मध्यस्थ कंपनी है जिसने भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सीधे मामलों की जानकारी देने की व्यवस्था बनाने का वादा किया है। अब तक, मेटा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट अमेरिका स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन’ (एनसीएमईसी) को करती थी।
सूत्रों ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक “बुनियादी सिद्धांत” है, जिस पर भारत में काम करने वाले किसी भी सोशल मीडिया मंच के लिए कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के अनुसार, सरकार उन मंचों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जो बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले से जरूरी कदम उठाने में नाकाम रहते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के मामलों की जानकारी कानून लागू करने वाली एजेंसियों को देने का मेटा का वादा, मंच को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में एक पहला कदम तो है, लेकिन अभी और भी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।
जुलाई की शुरुआत में प्रकाशित ‘बीबीसी आई’ की पड़ताल में आरोप लगाया गया कि इंस्टाग्राम पर सीएसईएएम को बढ़ावा देने वाले प्रायोजित विज्ञापन चलाए गए, जिनमें से कुछ उपयोगकर्ताओं को ऐसे टेलीग्राम चैनलों तक ले जाते थे, जहां बच्चों से जुड़ी यौन सामग्री मौजूद थी।
जांच में यह भी पाया गया कि मेटा की अनुशंसा प्रणाली ऐसी सामग्री वाले वीडियो को बढ़ावा दे रही थी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इंस्टाग्राम को ऐसे विज्ञापनों को बंद करने का आदेश दिया और सात दिन के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने अलग से दिल्ली पुलिस को यह जांच करने का निर्देश दिया कि क्या मेटा ने बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग संबंधी दायित्वों का पालन किया था। आयोग ने अगस्त की शुरुआत में एक और नोटिस जारी कर एमईआईटीवाई, पुलिस और मेटा से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश

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