दिल्ली पुलिस ने सुकेश चंद्रशेखर की याचिका पर आपत्ति जताई
दिल्ली पुलिस ने सुकेश चंद्रशेखर की याचिका पर आपत्ति जताई
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) दिल्ली पुलिस ने एक निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर की याचिका की दिल्ली उच्च न्यायालय में स्वीकार्यता पर आपत्ति जताई।
यह याचिका एक सुनवाई अदालत के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी जिसमें चंद्रशेखर को 2017 के भ्रष्टाचार के मामले में जमानत के लिए एक विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने के मकसद से खुद को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बताने को लेकर दोषी करार दिया गया था।
पुलिस ने दलील दी कि चंद्रशेखर की वह याचिका सुनवाई के लायक नहीं थी जिसमें उसने निचली अदालत के फैसले में उसके चरित्र पर की गई कुछ ‘‘अपमानजनक’’ टिप्पणियों को हटाने की अपील की थी।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि सुनवाई अदालत ने अब सजा का आदेश सुना दिया है, इसलिए चंद्रशेखर को अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देते हुए अपील दायर करनी चाहिए और उसी अदालत में सभी मुद्दे उठाने चाहिए।
न्यायमूर्ति मधु जैन ने कहा कि उच्च न्यायालय 3 नवंबर को याचिका की स्वीकार्यता पर दलीलें सुनेगा।
सुनवाई के दौरान, चंद्रशेखर के वकील ने कहा कि वह फैसले में की गई ‘‘अपमानजनक’’ टिप्पणियों को रद्द करवाना चाहते हैं, क्योंकि उनके मुवक्किल के खिलाफ दूसरे मामले भी लंबित हैं और ऐसी टिप्पणियां उनके अधिकारों को प्रभावित कर सकती हैं।
निचली अदालत ने 20 अगस्त को चंद्रशेखर को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 170 (खुद को सरकारी कर्मचारी बताना), 189 (सरकारी कर्मचारी को नुकसान पहुंचाने की धमकी) और 507 (गुमनाम संदेश के जरिए आपराधिक धमकी) के तहत दोषी करार दिया था।
निचली अदालत ने इस मामले में चंद्रशेखर को आठ साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में, चंद्रशेखर ने निचली अदालत के फैसले में उसके चरित्र पर की गई ‘‘अपमानजनक, निंदापूर्ण, आक्षेप लगाने वाली और अनावश्यक टिप्पणियों’’ को हटाने की अपील की है।
यह मामला 28 अप्रैल 2017 को फोन पर एक न्यायाधीश से संपर्क करने से संबंधित है, जब चंद्रशेखर भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस की हिरासत में था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, चंद्रशेखर ने पुलिस कॉन्स्टेबल मंजीत का मोबाइल फोन हासिल किया और उसका इस्तेमाल न्यायमूर्ति पूनम चौधरी के आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल फोन पर संपर्क करने के लिए किया। चौधरी उस समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष न्यायाधीश थीं।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश

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