नालसार से आईआईटी दिल्ली तक: अगस्त में भारत के शीर्ष संस्थानों में दिखी विरोध प्रदर्शनों की लहर
नालसार से आईआईटी दिल्ली तक: अगस्त में भारत के शीर्ष संस्थानों में दिखी विरोध प्रदर्शनों की लहर
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) आईआईटी दिल्ली से लेकर नालसार हैदराबाद और जामिया मिलिया इस्लामिया से लेकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली तक – अगस्त के महीने में देश भर के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में कई मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शनों की लहर देखने को मिली। जुलाई में नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हुए, जिसके कारण तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा। इसके बाद अगस्त की शुरुआत भी विरोध प्रदर्शनों के साथ मुश्किल भरी रही। इस महीने देश के प्रमुख परिसरों में हुए आंदोलनों की सूची इस प्रकार है…
1. नालसार विधि विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 400 से अधिक छात्रों ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को बुलाए जाने पर आपत्ति जताई थी। वे जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों से जुड़ी कुछ टिप्पणियों के कारण न्यायमूर्ति सूर्यकांत का विरोध कर रहे थे। विवाद ने तब एक नया मोड़ ले लिया जब भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) ने राज्य विधिज्ञ परिषदों को निर्देश दिया कि वे विश्वविद्यालय के 2026 के स्नातकों का अगले आदेश तक अधिवक्ता के तौर पर पंजीकरण न करें। बीसीआई ने कुछ ही घंटों में आदेश वापस ले लिया और बाद में घोषणा की कि संबंधित बैच के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई है। बाद में, प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने संबंधित निमंत्रण कभी स्वीकार ही नहीं किया, इसलिए कार्यक्रम में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। 2. नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बेंगलुरु स्नातक कर रहे 700 से अधिक छात्रों, मौजूदा छात्रों और पूर्व छात्रों ने एक बयान पर हस्ताक्षर करके विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को बुलाए जाने का विरोध किया। उन्होंने बीसीआई से अब वापस लिए जा चुके उस निर्देश के लिए माफ़ी मांगने की मांग भी की, जिसमें नालसार के 2026 के स्नातकों को वकील के तौर पर पंजीकृत न करने की बात कही गई थी। इसके बाद, एनएलएसआईयू ने ‘‘अपरिहार्य परिस्थितियों’’ का हवाला देते हुए 2026 में स्नातक करने वाले बैच के लिए अपना 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया। 3. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली परिसर की एक इमारत से 31 वर्षीय एमएससी छात्र के कथित तौर पर कूदकर आत्महत्या करने की घटना के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच, संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार के लिए मुआवजे की मांग की। आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने ‘धमकी भरे नारे’’ लगाकर ‘‘परिसर के शांतिपूर्ण कामकाज में बाधा’’ डालने वाले छात्रों को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। संस्थान ने मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच के लिए गठित समिति का पुनर्गठन किया, और दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता को इसका प्रमुख बनाया गया। यह घटनाक्रम तब हुआ जब जांच समिति के प्रमुख बनाए गए उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने ‘‘व्यक्तिगत कारणों’’ का हवाला देते हुए खुद को समिति से अलग कर लिया। 4. जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली एनएसयूआई की जामिया इकाई से जुड़े छात्रों ने परीक्षा के नतीजों में पारदर्शिता, प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा और इसमें कथित गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही की मांग करते हुए धरना दिया। विश्वविद्यालय ने विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में चार छात्रों को निलंबित कर दिया और उनके परिसर में आने पर रोक लगा दी है। विश्वविद्यालय का कहना है कि ये छात्र संस्थान की ‘सेंट्रल कैंटीन’ में अनधिकृत धरने में शामिल थे, जबकि उन्हें पहले ही बता दिया गया था कि विरोध-प्रदर्शन सिर्फ़ तय जगह पर ही किए जा सकते हैं। भाषा नेत्रपाल नरेशनरेश

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