दिल्ली दंगा: अदालत ने शिव विहार में जले हुए शव के मामले में पांच आरोपियों को बरी किया

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दिल्ली दंगा: अदालत ने शिव विहार में जले हुए शव के मामले में पांच आरोपियों को बरी किया

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 07:29 PM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 07:29 PM IST

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान शिव विहार से एक व्यक्ति का जला हुआ शव बरामद होने के मामले में गिरफ्तार पांच लोगों को मंगलवार को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रमुख प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में विरोधाभास है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह फरवरी 2020 के दंगों के दौरान हुई मोहम्मद अनवर की मौत से जुड़े मामले में लखपत, कुलदीप (मंगल सैन का पुत्र), योगेश, ललित और कुलदीप (श्याम बाबू का पुत्र) के खिलाफ सुनवाई कर रहे थे। इन लोगों पर हत्या, दंगा, आगजनी और डकैती के आरोपों के तहत मुकदमा चल रहा था।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, “मैं पाता हूं कि अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। सभी आरोपियों को संदेह का लाभ मिलने का अधिकार है। तदनुसार, सभी आरोपियों को उनके विरुद्ध तय किए गए सभी आरोपों से बरी किया जाता है।”

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को भीड़ ने शिव विहार में अनवर और उसके भाई सलीम की संपत्तियों पर हमला किया, घरेलू सामान लूट लिए, वाहनों और मकानों में आग लगा दी तथा अनवर को गोली मारने के बाद उसके शव को जला दिया।

जांच के दौरान पुलिस ने एक मानव पैर और अन्य अवशेष बरामद किए थे, जिनकी डीएनए जांच से अनवर के होने की पुष्टि हुई थी।

अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में सफल रहा कि बरामद शरीर के अंग अनवर के थे और उसकी मृत्यु हत्या का परिणाम थी, लेकिन यह संदेह से परे साबित नहीं कर सका कि हत्या के लिए आरोपी जिम्मेदार थे।

अदालत ने कहा, “सभी आरोपी शिव विहार, करावल नगर के निवासी हैं। इसलिए उनकी लोकेशन शिव विहार, करावल नगर क्षेत्र में होने को ऐसा दोषसिद्धि-सूचक तथ्य नहीं माना जा सकता, जिससे उनका अपराध सिद्ध हो सके।”

न्यायाधीश ने शिकायतकर्ता सलीम की गवाही को अविश्वसनीय माना, जो अभियोजन पक्ष का मुख्य गवाह था। अदालत ने घटना के समय, हमलावरों की पहचान और घटना को देखने की उसकी क्षमता को लेकर उसके बयानों में गंभीर असंगतियां पाईं।

अदालत ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) केवल आरोपियों की मौजूदगी शिव विहार के व्यापक क्षेत्र में दर्शाते हैं, जहां वे रहते थे, लेकिन इससे अपराध स्थल पर उनकी उपस्थिति साबित नहीं होती।

अदालत ने दो आरोपियों से कथित रूप से देसी पिस्तौल बरामद होने संबंधी अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए।

इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को उनके विरुद्ध तय किए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप