नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) दूरसंचार नियामक ट्राई ने अपने शुरुआती आकलन में यह पाया है कि भारती एयरटेल के हाल ही में पेश ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ प्लान ‘इंटरनेट निरपेक्षता’ (नेट न्यूट्रैलिटी) के नियमों का उल्लंघन नहीं करता है। मामले से जुड़े एक सूत्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
हालांकि, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) इस मुद्दे की विस्तृत जांच कर रहा है कि 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग के जरिये कुछ पोस्टपेड ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के लिए नेटवर्क का एक हिस्सा अलग करने से अन्य 5जी उपभोक्ताओं की सेवा गुणवत्ता पर कोई असर तो नहीं पड़ रहा।
नेटवर्क स्लाइसिंग वह तकनीक है जिसमें दूरसंचार नेटवर्क को अलग-अलग वर्चुअल हिस्सों में बांटकर अलग जरूरतों के हिसाब से सेवा दी जाती है।
सूत्र ने कहा कि नियामक ने एयरटेल से सेवा गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े और स्पष्टीकरण भी मांगे हैं। मामले की विस्तृत जांच पूरी करने की कोई समयसीमा तय नहीं की गई है और इस पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।
सूत्र ने कहा कि शुरुआती समीक्षा में फिलहाल तत्काल चिंता की कोई वजह सामने नहीं आई है और एयरटेल का यह प्लान इंटरनेट पर सभी उपयोगकर्ताओं के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किए जाने के सिद्धांत के अनुरूप है।
एयरटेल ने ट्राई से कहा है कि यह प्लान 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग के जरिये पोस्टपेड ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने के लिए है और इससे अन्य ग्राहकों की सेवा गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती है।
एयरटेल ने पिछले महीने ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ प्लान पेश किए थे, जिनमें भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी स्थिर इंटरनेट स्पीड का वादा किया गया है।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने 26 मई को दूरसंचार विभाग और ट्राई से इस तरह की सेवाओं के असर पर जवाब मांगा था। समिति ने आशंका जताई है कि ऐसे प्लान करोड़ों प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए समान इंटरनेट सेवा से समझौता कर सकते हैं।
एयरटेल ने संसदीय समिति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यह सेवा न तो इंटरनेट निरपेक्षता का उल्लंघन करती है और न ही प्रीपेड ग्राहकों की सेवा गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
वहीं, प्रतिस्पर्धी कंपनी रिलायंस जियो ने सुझाव दिया है कि ऐसी सेवाओं को शुरू करने से पहले दूरसंचार विभाग और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा इंटरनेट निरपेक्षता के सिद्धांतों के आधार पर विस्तृत जांच की जानी चाहिए।
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