दिल्ली छात्र प्रदर्शन: पेलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ याचिकाओं पर न्यायालय तीन अगस्त को सुनवाई करेगा

दिल्ली छात्र प्रदर्शन: पेलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ याचिकाओं पर न्यायालय तीन अगस्त को सुनवाई करेगा

दिल्ली छात्र प्रदर्शन: पेलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ याचिकाओं पर न्यायालय तीन अगस्त को सुनवाई करेगा
Modified Date: July 28, 2026 / 08:44 pm IST
Published Date: July 28, 2026 8:44 pm IST

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पूर्व आईपीएस अधिकारी और दो अन्य व्यक्तियों की ओर से दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई करने पर मंगलवार को सहमति जताई, जिनमें दावा किया गया है कि दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से दागे गए छर्रों से वे घायल हुए थे।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। पीठ ने कहा कि वह इस मामले पर विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ तीन अगस्त को सुनवाई करेगी।

अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी की ओर से दायर याचिका में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए ‘पंप एक्शन राइफल’ अथवा ‘प्रोजेक्टाइल एक्शन गन’ (पीएजी) से दागे जाने वाले पेलेट के इस्तेमाल को बंद करने या उस पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने सहित अन्य राहत देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि 25 वर्षीय कलाकार प्रशांत कुमार 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के रूप में शामिल हुए थे। इसमें दावा किया गया है कि प्रशांत की ओर से किसी प्रकार के उकसावे या आक्रामकता के बिना भी द्रुत कार्रवाई बल (आरएएफ) की गोलीबारी के दौरान ‘पेलेट’ लगने से वह घायल हो गए।

याचिका के मुताबिक, 26 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी 20 जुलाई को ही पासपोर्ट और वीजा संबंधी कार्य से कनॉट प्लेस क्षेत्र में मौजूद थे। उनका भी दावा है कि किसी प्रकार के उकसावे या आक्रामकता के बिना आरएएफ की गोलीबारी में उन्हें ‘पेलेट’ (छर्रे) लगे।

याचिका में कहा गया है, ‘‘20 जुलाई 2026 को भारत में उच्च शिक्षा की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले प्रश्नपत्र लीक के विरोध में कॉजपा की ओर से आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के द्रुत कार्रवाई बल (आरएएफ) की सहायता ली।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता संख्या-2 और 3 ने खुद देखा कि उस दिन शाम करीब चार से साढ़े चार बजे के बीच पुलिस और आरएएफ के जवानों ने लगातार आंसू गैस के गोले दागे, लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों को धकेलते हुए नयी दिल्ली के कनॉट प्लेस के इनर सर्किल की ओर ले गए।’’

उच्चतम न्यायालय ने जुनैद मलिक की याचिका पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई। मलिक ने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को भोजन उपलब्ध कराया था और उन्होंने अपने तथा अपने परिवार के सदस्यों को अवैध रूप से हिरासत में रखे जाने, धमकी दिए जाने और बलपूर्वक कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाया है।

जुनैद का आरोप है कि 24 जुलाई की आधी रात के आसपास रेबीज रोधी टीका लगवाने के बाद राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल से लौटते समय दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

जुनैद ने दावा किया कि उन्हें करीब पांच से छह घंटे तक पुलिस के एक वाहन में बंद रखा गया, जहां उन्हें धमकाया गया और उनसे पूछताछ की गई। जुनैद का यह भी आरोप है कि उनका मोबाइल फोन जबरन खुलवाकर उसकी तलाशी ली गई तथा अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए धन के स्रोत और वित्तपोषण के बारे में उनसे बार-बार पूछताछ की।

जुनैद की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि उनके मुवक्किल को ‘‘आंखों पर पट्टी बांधकर मसूरी ले जाया गया।’’

दिल्ली में 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व में निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुई थीं। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। बाद में यह विरोध-प्रदर्शन कई अन्य राज्यों में भी फैल गया।

प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

यह आंदोलन शनिवार को प्रधान के इस्तीफे तथा सरकार द्वारा नीट विवाद को लेकर कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजन को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस लेने की मांग स्वीकार करने के बाद समाप्त हो गया।

भाषा रवि कांत रवि कांत पारुल

पारुल


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