अहमदाबाद, 30 मई (भाषा) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सीमांत जिलों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन को देश के समक्ष “सबसे गंभीर चुनौती” बताते हुए इन घटनाक्रमों की सख्त निगरानी एवं नियमित रिपोर्टिंग पर जोर दिया है।
शनिवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि शाह ने गुजरात के कच्छ जिले में स्थित भुज में शुक्रवार को सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। शाह ने कहा कि सीमा जिलों के प्रशासन को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करनी चाहिए, ताकि मौजूदा घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके तथा ड्रोन एवं मादक पदार्थ से जुड़े खतरों पर निगरानी रखी जा सके।
विज्ञप्ति के अनुसार, शाह ने कहा कि सीमा जिलों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है और जिलाधिकारियों को ऐसे बदलावों की सख्त निगरानी करने के साथ ही नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करनी चाहिए।
इसी सप्ताह की शुरुआत में केंद्रीय गृहमंत्री ने “अवैध प्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों” से देश में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का आकलन करने तथा उनसे निपटने के उपाय सुझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की थी।
बैठक में शाह ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में अनधिकृत अतिक्रमण के खिलाफ “बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने” की नीति अपनाने और सीमा क्षेत्रों में कट्टरपंथ से जुड़े केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखने पर बल दिया।
शुक्रवार की इस बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के साथ वरिष्ठ अधिकारी तथा कच्छ, वाव-थराद और पाटन जिलों के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।
गृहमंत्री ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के कारण लोगों का वापस आना एक स्वागत योग्य घटनाक्रम है और पुलिस थानों से लेकर पटवारियों तक सभी को मिलकर काम करना चाहिए ताकि अवैध घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने प्रत्येक ऐसे जिले में सुरक्षा समन्वय समूह गठित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिनमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), तटरक्षक बल, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और प्रमुख बैंकों के प्रबंधक शामिल हों।
गृहमंत्री शाह ने कहा कि आयकर, धन शोधन विरोधी और सीमा शुल्क कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और सीमा क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) पर होनी चाहिए।
उन्होंने सीमा क्षेत्रों में हवाला लेनदेन, वित्तीय गतिविधियों, म्यूल अकाउंट, शेल कंपनी, संदिग्ध वाहनों तथा माल एवं सेवाकर (जीएसटी) संग्रह पर कड़ी निगरानी रखने पर भी जोर दिया।
शाह ने कहा कि वित्तीय अपराधों से जुड़ी एजेंसियों को सीमा क्षेत्रों की गतिविधियों से अवगत रखा जाना चाहिए तथा आयकर विभाग को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सहयोग से व्यापक सर्वेक्षण अभियान चलाना चाहिए।
उन्होंने तटीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने और कच्छ के अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) के निकट होने के कारण भारतीय तटरक्षक बल के साथ प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
शाह ने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेजेज’ पहल के साथ-साथ सीमांत गांवों में केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीमा पर बाड़बंदी, समुद्री सीमा सुरक्षा और गुजरात सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसके परिणामस्वरूप सीमा पर घुसपैठ और तस्करी की घटनाएं पूरी तरह समाप्त हो गई हैं।
भाषा अमित माधव
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