अहमदाबाद, तीन अगस्त (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत नगर निकाय को सोमवार को निर्देश दिया कि नासिरनगर इलाके में हाल में बड़ी संख्या में ढहाए गये मकानों के निकट किसी संपत्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने का इरादा है, तो कानून के तहत उचित कदम उठाया जाये।
जिस इलाके में 30 मई को सूरत नगर निगम (एसएमसी) द्वारा लगभग सौ संपत्तियों को गिराया गया था, उसके पास स्थित एक मकान के मालिक ने याचिका दायर की है। उन्होंने आशंका जताई है कि उनका मकान भी उसी तरह गिराया जा सकता है।
न्यायमूर्ति निखिल करियल ने अपने आदेश में कहा कि यदि एसएमसी को कोई कार्रवाई करनी है, तो वह कानून के अनुसार की जानी चाहिए।
सूरत नगर निकाय के वकील ने कहा कि अदालत 30 मई को सोसाइटी में की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़े मामले पर विचार कर रही है और फिलहाल एसएमसी वर्तमान याचिका में संबंधित संपत्ति को गिराने का इरादा नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि एसएमसी कोई कदम उठाता है, तो वह कानून के अनुसार ही उठाया जायेगा। इसके लिए पहले नोटिस जारी किया जायेगा और कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जायेगा।
उच्च न्यायालय नासिरनगर इलाके में 30 मई को एसएमसी द्वारा जिन लोगों के मकानों को गिराया गया था, उनमें से कुछ व्यक्तियों द्वारा दायर की गई याचिका पर अलग से सुनवाई कर रहा है।
अदालत ने उस कार्रवाई को ‘‘पूरी तरह अवैध’’ बताया था और उच्च-स्तरीय जांच की मांग की थी।
इस कार्रवाई के कारण सौ से अधिक परिवार बेघर हो गए हैं।
अदालत ने पुलिस आयुक्त से मौखिक रूप से यह सवाल भी किया कि मौके पर वरिष्ठ डीसीपी स्तर के पुलिस अधिकारी की मौजूदगी के बावजूद इस मामले में कोई शिकायत क्यों दर्ज नहीं की गई और जांच क्यों शुरू नहीं की गई।
भाषा देवेंद्र दिलीप
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