Three assembly by-election Results/Image Credit: AI
Three assembly by-election Results: नई दिल्ली: कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता… एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों और यही हुआ है आज बिहार की राजधानी पटना में। जहां तीन दशक से बीजेपी का अभेद्य किला की पहचान रखने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट को जनसुराज के प्रशांत किशोर ने भेद दिया है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर प्रशांत किशोर का ये सीधा निशाना महज विजयी उम्मीदवार का एक बयान मात्र नहीं है, बल्कि इस नतीजे के बाद बिहार की राजनीति में नई धमक का ऐलान भी है।
Three assembly by-election Results: बिहार के चुनावी इतिहास में पहली बार बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली है और बांकीपुर उपचुनाव उसी सीएम की पहली अग्निपरीक्षा भी माना जा रहा था, ऐसे में सम्राट को प्रशांत की जीत ने निश्चित रूप से अशांत कर दिया है…लेकिन शांत तो बीजेपी के नितिन नबीन भी नहीं होंगे क्योंकि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि अपने ही गृहराज्य में, अपनी ही विधानसभा सीट वो गंवा बैठेंगे।
बांकीपुर उपचुनाव के इस नतीजे का अंदाज़ा बीजेपी दिग्गजों को कतई नहीं था बल्कि वहां तो सुबह से ही ताबड़तोड़ लड्डू बनवाए जा रहे थे। (Three assembly by-election Results) ये मान कर चला रहा था तो बांकीपुर का नया बांकुरा तो युवा चेहरा नीरज कुमार सिन्हा ही बनने जा रहा है क्योंकि देश की सबसे बड़ी पार्टी के टिकट और राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट पर भला कैसी चुनौती? लेकिन, चाणक्य की धरती पाटलिपुत्र ने पीके को जीत दिला कर देश को ये संदेश दे दिया कि यूं ही नहीं कहा जाता कि बिहार को समझना हर किसी के वश की बात नहीं। ये हमेशा एक नया दिशा देता है, राजनीति की नई राह दिखाता है।
सवाल ये है कि आखिर पीके की जीत और बीजेपी की हार की वज़ह क्या रही? आख़िर चंद महीनों के भीतर ही कैसे बदल गई बिहार की चुनावी फिज़ा जहां ना सिर्फ बिहार बल्कि देश की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष तक की सीट नहीं बचा पाई? तो राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण होता है टाइमिंग…और इस उपचुनाव की पृष्ठभूमि में था।
Three assembly by-election Results: दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा असर बिहार में दिखा था। जहां पटना की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ आया था। जहां के सीवान में छात्रों के आंदोलन से निपटने के लिए एके 47 के इस्तेमाल तक की तस्वीरें सामने आई थीं। माना जाता है कि पटना की शहरी सीट होने के कारण, जहां बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा की तैयारी करते हैं, (Three assembly by-election Results) वहां इसका असर पड़ा, जिसे जनसुराज पार्टी ने अपने पक्ष में भुनाया और कैडर भी हार को भांप कर बूथ तक नहीं पहुंचे।
बांकीपुर की स्थानीय समस्याओं को जनसुराज ने प्रभावी तरीके से उठाया और ये भरोसा दिलाने में सफल रहे कि वर्षों तक जो काम नहीं हो सके हैं, उसे वो करके दिखाएंगे। दूसरी ओर, बीजेपी चूंकि लगातार सत्ता में रही है, इसलिए इसकी काट उनके पास नहीं थी।
प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार को लेकर बनाई गई उस धारणा को भी ध्वस्त कर दिया कि जातीय आधार पर ही वोट मिलते हैं। कायस्थ बहुल इस सीट से कायस्थ उम्मीदवार की हार हुई है, दूसरी ओर…राजद को मिले वोट बताते हैं कि उसके पारंपरिक वोट भी टूटे हैं। (Three assembly by-election Results) ये माना जाता था कि सवर्ण वोट बीजेपी के पक्के हैं और यादव वोट आरजेडी के, लेकिन PK ने दोनों खेमों के भ्रम को तोड़ दिया।
Three assembly by-election Results: अब तक के चुनाव में वोटर्स सिर्फ दो विकल्प को लेकर बूथ पर जाते थे कि एनडीए नहीं तो महागठबंधन, लेकिन, इस नतीजे ने पीके के रूप में तीसरे विकल्प को भी राजनीतिक ज़मीन दे दी है। वोटर्स पारंपरिक विकल्पों की जगह नई सोच को सामने लाने के पक्ष में नज़र आ रहे हैं।
बीजेपी के उम्मीदवार नीरज सिन्हा की तुलना में प्रशांत किशोर वोटर्स को ज्यादा दमदार, विज़नरी लगे। मैदान में उतरे तीनों उम्मीदवारों में से ये एक ऐसा फैक्टर था, जिसने प्रशांत किशोर के पक्ष में माहौल बनाया।
कुल मिलाकर ये कि बांकीपुर ने बीजेपी को ये संदेश दिया कि टेकन फॉर ग्रांटेड पॉलिटिक्स मंजूर नहीं है और सत्ता को जनता के मन की बात समझनी होगी। दूसरी ओर, आरजेडी के लिए नंबर तीन पर आना एक और चुनौती खड़ा कर गई है कि बतौर विपक्ष भी उसकी जगह खतरे में आ सकती है और जनसुराज के लिए ये कि खाता खोल दिया है, (Three assembly by-election Results) अब काम करके दिखाओ तो जनता साथ है।
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