डाक विभाग ने भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम पर स्मारक डाक टिकट जारी किये

Ads

डाक विभाग ने भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम पर स्मारक डाक टिकट जारी किये

  •  
  • Publish Date - April 12, 2026 / 06:51 PM IST,
    Updated On - April 12, 2026 / 06:51 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

बेंगलुरु, 12 अप्रैल (भाषा) डाक विभाग ने रविवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नेतृत्व में भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की उल्लेखनीय प्रगति का जश्न मनाने के लिए दो स्मारक डाक टिकट की शृंखला जारी की।

कर्नाटक डाक परिक्षेत्र के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल के. प्रकाश ने इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पहुंचने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की उपस्थिति में स्मारक डाक टिकट की शृंखला जारी की।

डाक विभाग के मुताबिक, स्मारक डाक टिकट में भारत की प्रारंभिक उपलब्धियों, जैसे आर्यभट उपग्रह का प्रक्षेपण, से लेकर मानव अंतरिक्ष उड़ान और कक्षीय अवसंरचना में भविष्य की महत्वाकांक्षाओं तक की यात्रा को दर्शाया गया है।

बयान में कहा गया कि ये भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत को भी प्रतिबिंबित करते हैं, जिसका प्रतीक जंतर-मंतर जैसे स्थल हैं।

भारतीय डाक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘ये डाक टिकट डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में भारत की शुरुआती प्रगति से लेकर वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने तक के सफर को दर्शाते हैं। ये चंद्रयान-3 और आगामी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान जैसी प्रमुख उपलब्धियों को उजागर करते हैं, जो देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और महत्वाकांक्षा का प्रतीक हैं।’’

डाक टिकटों की पहली शृंखला में गगनयान चालक दल के साथ-साथ भारतीय अंतरिक्ष केंद्र जैसी भविष्य की आकांक्षाओं को प्रदर्शित किया गया है, जो 2035 तक एक अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करने के भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि डाक टिकट की दूसरी शृंखला एक्सिओम 4 मिशन मशीन से प्रेरित है, जो ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को सम्मानित करती है, और भारत की प्राचीन खगोलीय विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक मशीनों से खूबसूरती से जोड़ती है।

अधिकारियों के मुताबिक, शुक्ला के ऐतिहासिक एक्सिओम 4 मिशन अंतरिक्ष उड़ान को प्रदर्शित करने वाली इन डाक टिकट को डिजाइनर मनीष त्रिपाठी ने डिजाइन किया है और रविवार को अंतरराष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस के अवसर पर जारी किए गए डाक टिकट का हिस्सा है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष मिशन या अन्वेषण में किसी राष्ट्र को बदलने की क्षमता होती है।

शुक्ला ने इसरो को गत वर्षों में मिली सफलता और अंतरिक्ष एजेंसी के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा, ‘‘उम्मीद है कि बहुत जल्द हम अपने रॉकेट और अपने प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों को भेज सकेंगे और उन्हें सुरक्षित वापस ला सकेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल जब मैं अमेरिका में इस (एक्सिओम-4) अंतरिक्ष मिशन के लिए प्रशिक्षण ले रहा था, तब एक मिशन की प्रतीकात्मक तस्वीरों के रूप में एक कहानी थी जिसे आप अपने साथ ले जा सकते थे, जो आज जारी किए गए डाक टिकट में से एक है।’’

इसरो के अध्यक्ष डॉ.वी. नारायणन ने राष्ट्र के लिए डाक विभाग की सेवाओं की सराहना की।

उन्होंने इसरो की वर्षों की उपलब्धियों और विशेषज्ञता का उल्लेख करते हुए कहा,‘‘आज इसरो में मेरे सहयोगियों के लिए उपग्रह बनाना बच्चों का खेल है… प्रक्षेपण यान की क्षमता की बात करें तो, एलवीएम-3 वर्तमान में 10,000 किलोग्राम तक का भार ले जा सकता है। हम अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान पर काम कर रहे हैं जो 30,000 किलोग्राम और 80,000 किलोग्राम भार को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जाने में सक्षम होगा।’’

मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देते हुए, इसरो प्रमुख ने कहा कि मिशन की तैयारी करते समय गगनयात्रियों (अंतरिक्ष यात्रियों) की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नारायणन ने कहा, ‘‘हमारे प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में कई गतिविधियां चल रही हैं। हम गगनयान मिशन पर काम कर रहे हैं। कृपया मुझसे इसकी तारीख न पूछें। यह एक प्रौद्योगिकी-प्रधान कार्यक्रम है, और हम समस्याओं का समाधान करते हुए आगे बढ़ रहे हैं और हर चरण में सफल हो रहे हैं। हम मानवरहित मिशन की योजना बना रहे हैं। तीन मानवरहित मिशन पूरे करने के बाद, हमें मानवयुक्त मिशन के लिए आगे बढ़ना होगा, क्योंकि हमारे लिए सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष केंद्र की योजना पर काम हो रहा है और यह कुल 52 टन का अंतरिक्ष केंद्र होगा।

नारायणन ने कहा, ‘‘भारत की योजना 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष केंद्र के पांच मॉड्यूल कक्षा में स्थापित करने की है। पहले मॉड्यूल को 2028 तक प्रक्षेपित किये जाने की उम्मीद है।’’

भाषा धीरज सुभाष

सुभाष