नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) दिल्ली सरकार ने 2023 की बाढ़ की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कमजोर तटबंधों को मजबूत किया है, 77 प्रमुख नालों से गाद निकालने का काम शुरू किया है और यमुना के बाढ़ क्षेत्र का नए सिरे से वैज्ञानिक अध्ययन करने का आदेश दिया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में पेश की गयी प्रगति रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आयी है।
दिल्ली के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने यह रिपोर्ट तब प्रस्तुत की जब एनजीटी ने उन मीडिया खबरों पर ध्यान दिया जिनमें यह सवाल उठाया गया था कि जुलाई 2023 जैसी बाढ़ का समय पर पूर्वानुमान क्यों नहीं लगाया जा सका।
बाढ़ के बाद, हथनीकुंड और ओखला बैराज के बीच बाढ़ प्रबंधन की समीक्षा करने के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की अध्यक्षता में एक संयुक्त बाढ़ प्रबंधन समिति (जेएफएमसी) का गठन किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने वर्षा, जल प्रवाह और बाढ़ के पैटर्न का अध्ययन किया। उसने पाया कि जुलाई 2023 में पांच दिनों में हुई वर्षा 1978 की तुलना में 23.8 प्रतिशत अधिक थी।
समिति ने इस पर भी गौर किया कि यमुना नदी के विभिन्न हिस्सों की जल वहन क्षमता क्या है। समिति ने कहा कि नदी की क्षमता उसके मार्ग में बदलती रहती है और कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की भविष्यवाणी में सुधार के लिए बेहतर आंकड़ों की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तटबंधों पर, नीली छतरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अल्पकालिक सुरक्षा उपाय किए गए हैं। कुछ स्थानों पर ‘रिटेनिंग वॉल’ का निर्माण किया गया है।
यमुना नदी और उसके बाढ़क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन चल रहा है तथा परिधि विवरण संबंधी अंतिम बाढ़क्षेत्र मानचित्र अगस्त 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि दिल्ली रेलवे ब्रिज पर जल निकासी लगभग 6,700 क्यूमेक या उससे अधिक हो जाती है, तो कुछ स्थानों पर पानी बाहर आ सकता है। सौ सालों में एक बार आने वाली बाढ़ की स्थिति में, लगभग 8,701 क्यूमेक पानी छोड़े जाने पर, मेटकाफ हाउस, नीली छतरी और यमुना बाजार जैसे क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।
मानसून से पहले 77 प्रमुख नालों से गाद निकालने का काम चल रहा है, जिसके तहत 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद हटाई जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नालों और बाढ़ नियंत्रण का काम संभालने वाली एजेंसियों के बीच समन्वय सुधारने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समिति का गठन किया गया है।
भाषा
राजकुमार माधव
माधव