ओएसएम संबंधी अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूरी: कांग्रेस

ओएसएम संबंधी अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूरी: कांग्रेस

ओएसएम संबंधी अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच के लिए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूरी: कांग्रेस
Modified Date: June 5, 2026 / 01:19 pm IST
Published Date: June 5, 2026 1:19 pm IST

नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली से जुड़ी कथित अनियमितता को लेकर शुक्रवार को कहा कि स्वतंत्र जांच के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जरूरी है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि यदि प्रधान का इस्तीफा नहीं होता है तो मोदी सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच समिति दिखावा बनकर रह जाएगी।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘सीबीएसई की संचालन इकाई ने दिसंबर 2024 की अपनी बैठक में यह चिंता जताई थी कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) को लागू करने के ‘वित्तीय प्रभाव’ मौजूदा व्यवस्था की तुलना में ‘काफी अधिक’ होंगे। अब एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सीबीएसई के ओएसएम प्रणाली की निविदा का अनुमानित अनुबंध मूल्य, समान मात्रा के काम के बावजूद, 10 करोड़ रुपये बढ़ गया।’

उन्होंने दावा किया कि सीबीएसई द्वारा जारी पहली दो निविदाओं में यह राशि 28 करोड़ रुपये थी, लेकिन ‘कोएम्प्ट’ (कांट्रैक्टर) को जारी अंतिम वर्क ऑर्डर में यह बढ़कर 38.46 करोड़ रुपये हो गई।

रमेश ने कहा, ‘और भी चिंताजनक बात यह है कि वास्तव में स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या और वास्तविक कीमत के आधार पर काम का मूल्य केवल 25.39 करोड़ रुपये बैठता है। यानी यह वर्क ऑर्डर में बताई गई राशि का लगभग 66 प्रतिशत ही है।’

उन्होंने कहा कि बीते मंगलवार को 18 वर्षीय व्हिसलब्लोअर सार्थक सिद्धांत को सुनने के बाद संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब सीबीएसई नहीं दे सका।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘इसकी वजह यह है कि केवल एक व्यक्ति मंत्री प्रधान ही बता सकते हैं कि आखिर संचालन इकाई द्वारा लागत को लेकर जताई गई चिंताओं के बावजूद सीबीएसई को इतनी महंगी ओएसएम प्रणाली बढ़ी हुई दरों पर अपनाने के लिए क्यों और कैसे मजबूर किया गया ?’

रमेश ने कहा, ‘मंत्री प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए ताकि सीबीएसई की स्वतंत्र जांच हो सके। अन्यथा मोदी सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति केवल एक दिखावा बनकर रह जाएगी।’

भाषा हक प्रचेता मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में