शबरिमला में ओणम साद्या को लेकर टीडीबी अध्यक्ष और देवस्वओम मंत्री के बीच मतभेद सामने आये

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शबरिमला में ओणम साद्या को लेकर टीडीबी अध्यक्ष और देवस्वओम मंत्री के बीच मतभेद सामने आये

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 05:02 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 05:02 PM IST

तिरुवनंतपुरम (केरलम), तीन सितंबर (भाषा) शबरिमला में श्रद्धालुओं को ओणम साद्या (पारंपरिक भोज) परोसे जाने को लेकर टीडीबी अध्यक्ष के. जयकुमार और राज्य के देवस्वओम मंत्री के. मुरलीधरन के बीच मतभेद सामने आए हैं।

जयकुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि पारंपरिक साद्या परोसा गया था जबकि मंत्री ने दावा किया कि श्रद्धालुओं को इसके बजाय पुलाव दिया गया था।

ओणम समारोह के तीन दिनों के दौरान शबरिमला में स्वयंसेवी संगठन श्रद्धालुओं को साद्या परोसने की परंपरा का पालन करते हैं।

हाल में ऐसी खबरें सामने आईं कि तिरुवोनम के दिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को साद्या परोसा गया जबकि श्रद्धालुओं को पुलाव दिया गया।

त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष जयकुमार ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि लगभग 3,000 लोगों को साद्या परोसा गया था।

मुरलीधरन ने हालांकि दावा किया कि श्रद्धालुओं को केवल पुलाव परोसा गया, जबकि अधिकारियों को साद्या दी गई।

जयकुमार ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों से कहा कि इस घटना को बड़ी विफलता बताना गलत है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसे ऐसी घटना बताना जिसमें बड़ी विफलता हुई, सच्चाई के विपरीत है। मैं पूरे विश्वास के साथ यह कह सकता हूं। कई लोगों ने कई लोगों को गुमराह किया है। उन्हें (मंत्री को) गलत रिपोर्ट मिली है। हम जो कुछ हुआ, उसके बारे में पूरी जानकारी दे सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई विफलता हुई है।’’

जयकुमार ने कहा कि पुलिस ने साद्या का आयोजन नहीं किया, जैसा कि वे आमतौर पर स्वेच्छा से करते थे।

उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने साद्या का आयोजन क्यों नहीं किया? क्योंकि हम उसे इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते; वे आमतौर पर स्वेच्छा से इसका आयोजन करते हैं। मेलशांति (मुख्य पुजारी) ने भी इसमें रुचि नहीं दिखाई। इन्हीं परिस्थितियों में हमने इसकी जिम्मेदारी संभाली।’’

जब पत्रकारों ने मुरलीधरन को जयकुमार के बयान के बारे में बताया, तो मंत्री ने कहा कि कई लोग तस्वीरों के साथ यह मामला उनके संज्ञान में लाये थे।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, वर्षों से चली आ रही परंपरा को क्यों तोड़ा गया? देवस्वओम बोर्ड दावे कर सकता है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं किया गया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘साद्या केवल तिरुवोनम के दिन तक ही सीमित कर दिया गया था। दूसरी बात, दो अलग-अलग प्रकार का खाना परोसा जाता हुआ देखा गया। उन्होंने मुझे चावल के ऊपर पीली कढ़ी डालने की तस्वीरें भी दिखाईं और उसे ‘पुलाव’ बताया। क्या यह गलत नहीं है? क्या ओणम साद्या इसी तरह परोसा जाना चाहिए?”

मुरलीधरन ने कहा, ‘‘उत्रादम, तिरुवोनम और अवित्तम के दिनों में साद्या परोसना हमेशा से परंपरा रही है। इसे रोककर क्या हासिल हुआ? इसलिए हमारा कहना है कि देवस्वओम बोर्ड को इसमें सुधार करना चाहिए।’’

भाषा देवेंद्र पवनेश

पवनेश