नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) डिजिटल गिरफ्तारी ठगी के 200 से अधिक मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 16 राज्यों के 80 स्थानों पर छापेमारी की है । इन मामलों में आरोपियों ने लोगों को ठगने के लिए उच्चतम न्यायालय की फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल किया था। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी की करीब 60 टीमों ने इस सप्ताह की शुरुआत में शुरू किए गए अभियान के तहत देशभर में 80 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
उन्होंने बताया कि इस अभियान का समापन दो आरोपियों बी. नरेश और संजीव साहा की गिरफ्तारी के साथ हुआ। इन्हें क्रमशः चेन्नई और कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपी कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के गठन तथा ‘म्यूल’ बैंक खातों को खोलने और उनके संचालन में शामिल थे।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा, ‘‘इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से अर्जित लगभग दो करोड़ रुपये की संदिग्ध धनराशि को वैध दिखाने के लिए किया गया था।’’
यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज प्राथमिकी के बाद की गई। यह प्राथमिकी उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जालसाज उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट से मिलते-जुलते यूआरएल का इस्तेमाल कर ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के नाम पर लोगों को ठग रहे थे।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘सीबीआई ने हाल ही में एक फर्जी वेबसाइट का पता लगाया है, जिसका यूआरएल भारत के उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट से धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से मिलता-जुलता था। आरोप है कि जालसाजों ने इस फर्जी रूप से पंजीकृत डोमेन का इस्तेमाल ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के नाम पर लोगों को ठगने के लिए किया। भारत के उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री से प्राप्त शिकायत के आधार पर सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर इस मामले की जांच शुरू की है।’’
भाषा तान्या रंजन
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