संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए: सीजेआई सूर्यकांत

संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए: सीजेआई सूर्यकांत

संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए: सीजेआई सूर्यकांत
Modified Date: July 13, 2026 / 10:32 pm IST
Published Date: July 13, 2026 10:32 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय के अदालत कक्ष में एक वादी द्वारा हाल ही में की गई बदसलूकी और अपशब्दों के इस्तेमाल पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।

सीजेआई की यह टिप्पणी ‘ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट एसोसिएशन’ द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में आई, जो उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश पंकज मिथल और नव नियुक्त न्यायाधीशों-न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति वेंकिटा सुब्रमणि मोहना के सम्मान में आयोजित किया गया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने घटना पर एक सवाल के जवाब में मीडियाकर्मियों से कहा, ‘‘मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। बच्चे ऐसा कई बार कर देते हैं, लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि हमें संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा, मान-सम्मान बनाए रखना चाहिए। यह हम सबका दायित्व है, सबको इसको निभाना है।’’

एक नाटकीय घटनाक्रम में, शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए एक याचिकाकर्ता को जबरन अदालत से बाहर निकाल दिया गया। उसपर आरोप है कि उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर सुनवाई के दौरान अपशब्द कहे और अपने कानूनी दस्तावेज़ फेंक दिए।

यह घटना न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की आंशिक कार्य दिवस पीठ के समक्ष हुई थी।

भाषा नेत्रपाल दिलीप

दिलीप


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