नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुजान सिंह पार्क के एक हिस्से को अपने कब्जे में लेने के केंद्र सरकार के प्रयास को सही ठहराने वाले जिला अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है और सभी पक्षों को एंबेसडर होटल सहित पूरे परिसर पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि यह विवाद केंद्र सरकार और ‘सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड’ के बीच 1945 में हुए स्थायी पट्टे से उपजा है और कानूनी मामला लंबित होने के बावजूद 1960 से ही उस जगह पर रियल-एस्टेट कंपनी का कब्जा सुरक्षित रहा है।
यह अंतरिम आदेश ‘सर शोभा सिंह एंड सन्स’ की उस अपील पर आया, जो कंपनी ने जिला अदालत के नौ जून के फैसले के खिलाफ दायर की थी।
जिला अदालत ने दीवानी अदालत के 2009 के उस आदेश को पलट दिया था, जिसमें कहा गया था कि स्थायी पट्टे के खत्म होने के बाद 1960 में सरकार का उस जगह को “फिर से अपने कब्जे में लेने” का प्रयास गैरकानूनी था।
उच्च न्यायालय ने 10 अगस्त के अपने आदेश में कहा, “बड़े पैमाने पर पैसा लगाया गया और पूरे सुजान सिंह पार्क परिसर/विवादित संपत्ति का विकास किया गया। वर्ष 1960 से ही वादी का कब्जा सुरक्षित रहा है और विवादों का निपटारा कानून के अनुसार किए जाने का इंतजार है…।”
उसने कहा, “इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि इस संपत्ति पर निर्माण कार्य किया गया है और यह 1960 के दशक से इस्तेमाल में है। विवादित फैसले का असर न सिर्फ अपीलकर्ता के अधिकारों पर पड़ेगा, बल्कि उस संपत्ति पर बने फ्लैट में रहने वाले लोग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।”
अदालत ने कहा, “दिनांक 09.06.2026 के फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाती है और अपील के निपटारे तक सभी पक्षों को विवादित संपत्ति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया जाता है।”
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिला अदालत के नौ जून के फैसले को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) अधिनियम के तहत किसी कार्यवाही को शुरू करने या उसे जारी रखने का आधार नहीं बनाया जाएगा।
संपदा अधिकारी, भूमि एवं विकास कार्यालय ने ‘सर सोभा सिंह एंड संस’ को 11 जून को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर पूछा कि सुजान सिंह पार्क (उत्तर) के नाम से जानी जाने वाली 7.58 एकड़ जमीन से उसे क्यों न बेदखल कर दिया जाए।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि पूरा विवाद सुजान सिंह पार्क में स्थित ‘होटल ब्लॉक’ नामक इमारत के निर्माण एवं इस्तेमाल, “सर्वेंट्स ब्लॉक” में बने घरेलू सहायकों के क्वार्टर और 31 गैराज के कथित दुरुपयोग को लेकर है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से “स्पष्ट रूप से” पता चलता है कि “होटल ब्लॉक” का निर्माण सरकार के सक्षम अधिकारियों की जानकारी और मंजूरी से किया गया था तथा बाद में होटल के लिए पूर्व प्रभाव से स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई थी।
भाषा पारुल अविनाश
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