अनुशासन और लगातार अभ्यास ने नीट-यूजी में तीसरी रैंक पाने में मदद की: उपलक्ष्य गोयल

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अनुशासन और लगातार अभ्यास ने नीट-यूजी में तीसरी रैंक पाने में मदद की: उपलक्ष्य गोयल

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 03:55 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 03:55 PM IST

जयपुर, 17 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक (यूजी) पुनर्परीक्षा की ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) में तीसरे स्थान पर रहे उपलक्ष्य गोयल ने अपनी सफलता का श्रेय अनुशासन पूर्ण तैयारी, लगातार अभ्यास और अपने माता-पिता व शिक्षकों के सहयोग को दिया है।

गोयल ने बताया कि वह दिन में 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे और डॉक्टर बनने के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते थे।

उन्होंने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘सबसे बड़ी खुशी अपने माता-पिता को खुश देखना है जिन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया।’

नीट के प्रश्न पत्र लीक होने का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि वह शुरू में निराश हुए थे।

उन्होंने कहा, ‘यह अनिश्चित लग रहा था कि इतनी कड़ी मेहनत के बाद नतीजे का कोई महत्व रहेगा या नहीं। बाद में, मैंने दोबारा परीक्षा को अपनी गलतियों को सुधारने के एक मौके के तौर पर देखा।’

गोयल ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने पारिवारिक कार्यक्रमों और बाहर घूमने-फिरने से परहेज किया और अपना पूरा समय पढ़ाई में लगाया। नीट की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने शिक्षकों पर भरोसा करना चाहिए, नियमित रूप से सवालों का अभ्यास करना चाहिए और अपना आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए बार-बार ‘टेस्ट’ देने चाहिए।

उनके पिता मुकेश गोयल ने कहा कि यह उपलब्धि परिवार के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि उनके बेटे ने बिना कोई ‘ड्रॉप ईयर’ लिए पहले ही प्रयास में नीट पास करने का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा, ‘वह हमेशा से डॉक्टर बनना चाहता था। पेपर लीक होने के बाद भी वह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहा। हमें उसकी तैयारी के स्तर से पता था कि वह अच्छा प्रदर्शन करेगा।’

उपलक्ष्य की मां अनुराधा गोयल ने कहा कि उनके बेटे ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पढ़ने के अपने सपने को पूरा करने के लिए सामाजिक कार्यक्रमों तक को छोड़ दिया।

उन्होंने कहा, ‘पेपर लीक के बाद निराश होने के बावजूद उसने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा और कड़ी मेहनत जारी रखी।’

उपलक्ष्य ने कहा कि उन्होंने अपने दोस्तों की पढ़ाई से जुड़ी शंकाओं को दूर करने में भी मदद की। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और समर्पण ही सफलता की कुंजी हैं।

भाषा पृथ्वी वैभव

वैभव