मंगलुरु में विस्थापित परिवारों ने एमआरपीएल से अधिगृहित भूमि लौटाने की मांग की

मंगलुरु में विस्थापित परिवारों ने एमआरपीएल से अधिगृहित भूमि लौटाने की मांग की

मंगलुरु में विस्थापित परिवारों ने एमआरपीएल से अधिगृहित भूमि लौटाने की मांग की
Modified Date: August 12, 2026 / 10:47 am IST
Published Date: August 12, 2026 10:47 am IST

मंगलुरु (कर्नाटक), 12 अगस्त (भाषा) मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) के चौथे चरण के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण के कारण विस्थापित परिवारों ने मांग की है कि कंपनी तीन महीने के भीतर उन्हें नौकरियां एवं अन्य पुनर्वास लाभ उपलब्ध कराए अन्यथा उनकी जमीन वापस करे।

एमआरपीएल चतुर्थ चरण के लिए विस्थापित व्यक्तियों की समिति की कुट्टेथूर में हुई एक बैठक में यह मांग उठाई गई।

समिति के सदस्यों ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि मई, 2026 में हुई एक बैठक में यह निर्णय किया गया था कि पात्र विस्थापित परिवारों को तीन महीने के भीतर नौकरियां और अन्य लाभ उपलब्ध कराए जाएंगे।

समिति के मानद अध्यक्ष डोनी सोरेस ने आरोप लगाया कि जुलाई, 2024 में हुई बैठक उपायुक्त की उपस्थिति में हुई थी जिसमें वादा किया गया था कि दिसंबर, 2016 में पंचायत कर भुगतान का रिकॉर्ड रखने वाले लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि उस बैठक में यह निर्देश भी दिया गया था कि सात महीने के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, समिति को बगैर सूचित किए एमआरपीएल के अधिकारियों ने पात्रता का मानक संशोधित कर दिया और इन बदलावों को सरकार को भेज दिया जिसमें आधार, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज अनिवार्य कर दिए गए।

उन्होंने दावा किया कि बाद में सरकार के आदेश से रोजगार देने की सात महीने की समय सीमा हटा दी गई।

सोरेस ने कहा कि एमआरपीएल ने पूर्व उपायुक्त मुल्लाई मुहिलान की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में उन लोगों को रोजगार देने के मुद्दे पर सहमति जताई थी जिनके पास पंचायत कर के रिकॉर्ड हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बैठक में स्थानीय सांसद और विधायक मौजूद थे।

समिति के अध्यक्ष सुधाकर शेट्टी ने कहा कि पांच साल बीत जाने के बावजूद प्रभावित लोगों को नियुक्ति का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। इस तरह से, पिछले 11 साल से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे सैकड़ों उम्मीदवारों का भविष्य अधर में है।

समिति ने अगले एक-दो महीने में मांगें नहीं माने जाने पर अपना आंदोलन तेज करने का निर्णय किया है। इसने राज्य और राष्ट्रीय स्तर के किसान संगठनों को भी इस आंदोलन में शामिल करने और एमआरपीएल परिसर के सामने विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है।

भाषा सं राजेंद्र सिम्मी सुरभि

सुरभि


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