अवसंरचना अनुबंधों की प्रारंभिक जांच से विवादों को टाला जा सकता है : पूर्व सीजेआई यू यू ललित

अवसंरचना अनुबंधों की प्रारंभिक जांच से विवादों को टाला जा सकता है : पूर्व सीजेआई यू यू ललित

अवसंरचना अनुबंधों की प्रारंभिक जांच से विवादों को टाला जा सकता है : पूर्व सीजेआई यू यू ललित
Modified Date: March 7, 2026 / 08:05 pm IST
Published Date: March 7, 2026 8:05 pm IST

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश यू. यू. ललित ने शनिवार को कहा कि अवसंरचना अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने से पहले एक विशेष सरकारी एजेंसी द्वारा उनकी जांच की जानी चाहिए, क्योंकि प्रारंभिक जांच से महंगे मध्यस्थता विवादों को रोका जा सकता है और करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन की बचत हो सकती है।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित राष्ट्रीय राजधानी में ‘निर्माण और अवसंरचना क्षेत्र के लिए विवाद समाधान और मध्यस्थता मानदंड: भारतीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य’ विषय पर एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे अनुसार, इन सभी निर्माण और अवसंरचना परियोजना संबंधी अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए जाने से पहले मंत्रालय की एक एजेंसी द्वारा उनकी जांच की जानी चाहिए। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां यदि आप सावधानी बरतते हैं, तो आप करोड़ों रुपये की बचत कर सकते हैं।’’

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ललित ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 20 निर्माण और अवसंरचना संबंधी मध्यस्थताओं से जुड़े रहने के अपने अनुभव का जिक्र किया और कहा कि कई विवाद अनुबंध तैयार करने, परियोजना और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय में कमियों के कारण उत्पन्न होते हैं।

उन्होंने कहा कि अवसंरचना परियोजनाओं में मध्यस्थता के दावे अक्सर मूल परियोजना लागत से अधिक होते हैं, जिससे ऐसी धारणा बनती है कि ठेकेदार कभी-कभी अधिक मुआवज़ा पाने के लिए इस तंत्र का उपयोग करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि परियोजना लागत लगभग 800 करोड़ रुपये थी, तो दावे 1,000 करोड़ रुपये से अधिक होते हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि मध्यस्थता ठेकेदारों के लिए अधिकतम लाभ प्राप्त करने का साधन बन गई है।’

उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हेमा कोहली ने भी कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत में राजमार्गों, रेलवे, शहरी परिवहन, ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है, जो देश के विकास परिदृश्य को नया रूप दे रहा है।

उन्होंने प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं को समर्थन देने और निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए मजबूत विवाद समाधान ढांचों के महत्व पर जोर दिया।

इस कार्यक्रम में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तेजस कारिया और पूर्व न्यायाधीश जयंत नाथ सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

भाषा अविनाश सुरेश

सुरेश


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