(तस्वीरों के साथ)
कोयंबटूर (तमिलनाडु), 18 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक उनकी सरकार का एक नेक प्रयास था जो द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और कांग्रेस के कारण ‘‘पटरी से उतर गया’’ और इसे “नफरत एवं ओछी राजनीति का निशाना” बना दिया गया।
शुक्रवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने पर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रमुक और कांग्रेस को विशेष रूप से निशाना बनाते हुए प्रधानमंत्री ने पूछा, “आम महिलाओं को आगे बढ़ते देखकर द्रमुक और कांग्रेस को क्या परेशानी होती है?”
मोदी ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से विपक्षी दलों से विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी और यहां तक कि उन्हें इसका श्रेय देने की पेशकश भी की थी क्योंकि “मैं केवल यह चाहता था कि साधारण परिवारों की बहनें अच्छी संख्या में संसद और विधानसभाओं में आएं।”
उन्होंने आरोप लगाया, “लेकिन दुर्भाग्य से, यह नेक प्रयास विफल हो गया। द्रमुक, कांग्रेस और उनके सहयोगियों ने इसे नफरत और ओछी राजनीति का निशाना बना दिया।”
यहां एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक पारित हो जाता, तो साधारण परिवारों की कई तमिल महिलाएं सांसद और विधायक बन जातीं। मोदी ने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर, तमिलनाडु को लोकसभा में और भी कई सीट मिलने वाली थीं, “लेकिन स्पष्ट रूप से द्रमुक ऐसा नहीं चाहती थी”।
उन्होंने कांग्रेस और द्रमुक की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया, “आम महिलाओं को आगे बढ़ते देखकर द्रमुक और कांग्रेस को क्यों परेशानी होती है? ये परिवारवादी पार्टियां सत्ता को अपने ही परिवार तक सीमित रखना चाहती हैं।”
मोदी ने तमिलनाडु की महिलाओं से अपील की कि वे द्रमुक से पूछें कि उन्होंने उस विधेयक का विरोध क्यों किया जो उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था, और उन्होंने “तमिल महिलाओं को इस सुनहरे अवसर से क्यों वंचित किया”।
प्रधानमंत्री ने चुनाव के दिन का जिक्र करते हुए कहा, “23 अप्रैल को उन्हें एक स्पष्ट और सशक्त संदेश दें।”
भाषा प्रशांत नेत्रपाल
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